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जाम में छूटा एग्जाम
पटना में ट्रैफिक जाम से मैट्रिक परीक्षा छूटी तनाव में छात्रा ने दी जान
ट्रैफिक जाम मैट्रिक परीक्षा तनाव छात्रा आत्महत्या रेल ट्रैक मसौढ़ी परिवार शोक प्रशासन सवाल
19 Feb 2026, 03:39 PM Bihar - Patna
Reporter : Mahesh Sharma
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Patna पटना (मसौढ़ी): बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां मैट्रिक परीक्षा छूटने के तनाव में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और परीक्षा व्यवस्था व ट्रैफिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, खैरजवां गांव की रहने वाली छात्रा मंगलवार को अपनी मैट्रिक परीक्षा देने के लिए बरनी परीक्षा केंद्र जा रही थी। परिवार के मुताबिक वह पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर और उत्साहित थी। लेकिन परीक्षा के समय अचानक रास्ते में भीषण ट्रैफिक जाम लग गया, जिसके कारण वह निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकी।

जब छात्रा को यह अहसास हुआ कि उसकी परीक्षा छूट गई है, तो वह गहरे सदमे में आ गई। परिजन उसे समझाकर घर ले आए। परिवार को लगा कि वह धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी, लेकिन अंदर ही अंदर वह तनाव और निराशा से जूझ रही थी।

बताया जाता है कि घर लौटने के कुछ समय बाद छात्रा चुपचाप बिना किसी को बताए निकल गई। बाद में पता चला कि वह पटना-गया रेलखंड पर तरेगना स्टेशन और छोटकी मसौढ़ी हॉल्ट के बीच महाराजचक गांव के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध है।

इस घटना ने परीक्षा के दौरान छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा को लेकर बच्चों पर अत्यधिक सामाजिक और पारिवारिक दबाव उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। एक परीक्षा छूट जाना जीवन का अंत नहीं हो सकता, लेकिन कई बार किशोर उम्र के बच्चे इस असफलता को सहन नहीं कर पाते।

साथ ही, ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए ताकि छात्रों को समय पर केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो।

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों को केवल सफलता की दौड़ में धकेलने के बजाय उनकी मानसिक सेहत पर भी ध्यान दिया जाए। परिवार, स्कूल और प्रशासन — सभी की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।