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लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आया अहम फैसला
नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी हरपालानी के बीच चला लंबा वैवाहिक विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। इंदौर की फैमिली कोर्ट ने लगभग आठ साल तक चली सुनवाई के बाद दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी। यह मामला केवल एक सामान्य पारिवारिक विवाद नहीं था, बल्कि इसमें कई गंभीर आरोप और कानूनी पेचीदगियां भी शामिल थीं।
करीब 18 साल पहले हुई इस शादी में समय के साथ तनाव बढ़ता गया। साल 2018 में जानकी हरपालानी ने अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार न्यायालय में विचाराधीन रहा।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया। इस फैसले के साथ ही एक लंबे विवाद का अंत हुआ, जिसने कई सालों तक सुर्खियां बटोरीं।
पत्नी ने लगाए मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप
जानकी हरपालानी ने अपनी याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें मानसिक प्रताड़ना प्रमुख थी। उन्होंने दावा किया कि शादी के बाद उन्हें लगातार मानसिक तनाव और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अदालत से एकमुश्त 5 करोड़ रुपये की मांग भी की थी, ताकि वह अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें। उनके वकीलों ने कोर्ट में कई दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर उन्होंने अपनी बात को मजबूत किया।
इस मामले में अदालत ने दोनों पक्षों की बातों को विस्तार से सुना और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया।
कोर्ट ने दो करोड़ रुपये एलिमनी तय की
अदालत ने अपने फैसले में नारायण साईं को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर अपनी पत्नी को 2 करोड़ रुपये एलिमनी के रूप में दें। हालांकि, यह राशि पत्नी की मांग से कम है, लेकिन कोर्ट ने इसे परिस्थितियों के अनुसार उचित माना।
इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने अंतरिम राहत के तौर पर हर महीने भरण-पोषण भत्ता भी तय किया था। अंतिम फैसले में एकमुश्त राशि देने का आदेश दिया गया, जिससे आगे किसी तरह का विवाद न रहे।
यह फैसला इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे दोनों पक्षों के बीच आर्थिक विवाद भी खत्म हो जाएगा।
आठ साल तक चली सुनवाई ने खींचा ध्यान
यह मामला करीब आठ वर्षों तक अदालत में चलता रहा, जिसके दौरान कई बार सुनवाई टली और नए तथ्य सामने आए। इस लंबे समय तक चले केस ने न्याय प्रक्रिया की जटिलताओं को भी उजागर किया।
इस दौरान दोनों पक्षों को कई कानूनी और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया।
अंततः 2 अप्रैल 2026 को अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया, जिससे इस लंबे विवाद का पटाक्षेप हुआ।
पहले से विवादों में रहा है नारायण साईं का नाम
नारायण साईं पहले भी कई गंभीर मामलों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। उन्हें एक रेप केस में सजा भी हो चुकी है, जिसके चलते उनका नाम पहले से ही विवादों में रहा है।
इस पृष्ठभूमि के कारण यह तलाक मामला और अधिक चर्चित हो गया। लोगों की नजर इस केस पर लगातार बनी रही, क्योंकि इसमें एक हाई-प्रोफाइल व्यक्ति शामिल था।
हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में केवल इस तलाक से जुड़े तथ्यों पर ही ध्यान केंद्रित किया और उसी आधार पर निर्णय दिया।
फैसले के बाद आगे की राह पर नजर
इस फैसले के बाद अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, एलिमनी की राशि तय समय में चुकानी होगी, जिससे इस मामले का पूर्ण रूप से निपटारा हो सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कई मामलों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, खासकर जहां लंबे समय तक पारिवारिक विवाद चलते हैं।
फिलहाल इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि न्यायिक प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन अंततः न्याय मिलने की संभावना बनी रहती है।
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