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पाकिस्तान में गरीबी लगातार बढ़ी
दक्षिण एशिया सुधरा लेकिन पाकिस्तान की आर्थिक हालत बिगड़ी
छह वर्षों में पाकिस्तान में बढ़ी गरीबी दक्षिण एशिया आगे निकला लेकिन अर्थव्यवस्था रही कमजोर
21 Feb 2026, 05:13 PM
Punjab -
Lahore
Reporter :
Mahesh Sharma
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Lahore दक्षिण एशिया के कई देश पिछले कुछ वर्षों में गरीबी कम करने में उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले छह वर्षों में पाकिस्तान में गरीबी का स्तर लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे देश की आर्थिक चुनौतियां और स्पष्ट हो गई हैं।
2024-25 के आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में गरीबी दर 2018-19 में लगभग 21.9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 29 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है। इस दौरान देश के लगभग सभी प्रांतों में गरीबी बढ़ी है। खासतौर पर पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गरीब आबादी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि बलूचिस्तान में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता विदेशी कर्ज और राजनीतिक अस्थिरता गरीबी बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। लगातार बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों की क्रय शक्ति को कम कर दिया है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। बेरोजगारी और उद्योगों की धीमी रफ्तार ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है।
पाकिस्तान सरकार के योजना मंत्री अहसान इकबाल द्वारा जल्द ही गरीबी से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जारी किए जाने की संभावना है। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक देश की आर्थिक स्थिति अपेक्षा से अधिक कमजोर रही है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आर्थिक सुधार योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाया।
इसके विपरीत दक्षिण एशिया के अन्य देशों ने गरीबी कम करने में सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। भारत में पिछले एक दशक में करोड़ों लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। विश्व बैंक के अनुसार भारत ने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं श्रीलंका में गरीबी दर लगभग 18 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है, जो पाकिस्तान से कम है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान को गरीबी कम करने के लिए स्थिर नीतियों, निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन पर ध्यान देना होगा। भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और आर्थिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन से ही हालात सुधर सकते हैं।
यदि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहीं तो आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां और गहरी हो सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए गरीबी कम करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
2024-25 के आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में गरीबी दर 2018-19 में लगभग 21.9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 29 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है। इस दौरान देश के लगभग सभी प्रांतों में गरीबी बढ़ी है। खासतौर पर पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गरीब आबादी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि बलूचिस्तान में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता विदेशी कर्ज और राजनीतिक अस्थिरता गरीबी बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। लगातार बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों की क्रय शक्ति को कम कर दिया है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। बेरोजगारी और उद्योगों की धीमी रफ्तार ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है।
पाकिस्तान सरकार के योजना मंत्री अहसान इकबाल द्वारा जल्द ही गरीबी से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जारी किए जाने की संभावना है। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक देश की आर्थिक स्थिति अपेक्षा से अधिक कमजोर रही है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आर्थिक सुधार योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाया।
इसके विपरीत दक्षिण एशिया के अन्य देशों ने गरीबी कम करने में सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। भारत में पिछले एक दशक में करोड़ों लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। विश्व बैंक के अनुसार भारत ने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं श्रीलंका में गरीबी दर लगभग 18 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है, जो पाकिस्तान से कम है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान को गरीबी कम करने के लिए स्थिर नीतियों, निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन पर ध्यान देना होगा। भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और आर्थिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन से ही हालात सुधर सकते हैं।
यदि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहीं तो आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां और गहरी हो सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए गरीबी कम करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।