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बिहार में बदले आंकड़े
विधानसभा समीकरणों से कई दलों की सीटें खतरे में
राज्यसभा चुनाव में बदले समीकरण, क्षेत्रीय दलों की पकड़ कमजोर पड़ने के संकेत
21 Feb 2026, 11:26 AM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
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Mumbai देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव ने राष्ट्रीय राजनीति का माहौल गरमा दिया है। इन चुनावों में विधानसभा की मौजूदा स्थिति के आधार पर परिणाम तय होंगे, इसलिए हालिया विधानसभा चुनावों और दल-बदल के घटनाक्रमों का सीधा असर राज्यसभा की तस्वीर पर दिख सकता है।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार और महाराष्ट्र को लेकर हो रही है। बिहार में पाँच सीटों पर चुनाव प्रस्तावित है। विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की मजबूत स्थिति को देखते हुए चार सीटों पर उसकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है। इससे Lalu Prasad Yadav की पार्टी Rashtriya Janata Dal के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण आरजेडी की राज्यसभा में संख्या घटने की संभावना जताई जा रही है।

महाराष्ट्र की सात सीटों पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। विधानसभा चुनावों के बाद राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव आया है। इसका असर Sharad Pawar और Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले दलों पर पड़ सकता है। दोनों नेताओं के खेमे से राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन वर्तमान संख्या बल उनके पक्ष में पहले जैसा नहीं दिख रहा।

वहीं भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाला गठबंधन कई राज्यों में बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। Bharatiya Janata Party के पास पहले से मौजूद सीटों को बरकरार रखने के साथ कुछ नई सीटें जोड़ने का अवसर भी है। महाराष्ट्र, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी का गणित मजबूत माना जा रहा है।

तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भी चुनावी जोड़-तोड़ तेज हो गई है। इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम रहेगी, लेकिन विधानसभा की बदली तस्वीर ने कई दलों की रणनीति को प्रभावित किया है। कुछ जगहों पर कांग्रेस को सहयोगियों के साथ तालमेल बैठाने में कठिनाई हो सकती है।

राज्यसभा चुनाव सीधे तौर पर केंद्र की राजनीति को प्रभावित करते हैं, क्योंकि उच्च सदन में संख्या बल कानून पारित कराने और नीतिगत फैसलों में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस-वोटिंग रोकने के प्रयास में जुट गए हैं।

कुल मिलाकर 16 मार्च का यह चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी होगा। परिणाम यह तय करेंगे कि संसद के उच्च सदन में किस दल या गठबंधन की पकड़ मजबूत होती है और किसकी रणनीति को झटका लगता है।