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विमान हादसे पर सियासी विवाद
VSR कंपनी और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे
अजित पवार विमान हादसे पर रोहित पवार के आरोप, उड्डयन मंत्री इस्तीफे की मांग तेज
21 Feb 2026, 02:22 PM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
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Mumbai महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता रोहित पवार ने प्रेस वार्ता कर कई गंभीर सवाल उठाए और केंद्र सरकार पर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।

रोहित पवार ने कहा कि विमान दुर्घटना से जुड़े कई पहलू अब तक स्पष्ट नहीं किए गए हैं। उनका आरोप है कि हादसे में शामिल विमान की देखरेख से जुड़ी VSR कंपनी को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस कंपनी से जुड़े कुछ लोगों के सत्ताधारी दल से संबंध हैं, जिसके कारण निष्पक्ष जांच पर संदेह पैदा हो रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोहित पवार ने कहा कि दुर्घटना के समय विमान में एक से अधिक धमाके हुए थे। इस वजह से ब्लैक बॉक्स की स्थिति और तकनीकी जांच को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जांच पारदर्शी नहीं हुई तो सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमानन क्षेत्र के नियामक संस्थानों की भूमिका पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। रोहित पवार के मुताबिक, यदि सुरक्षा मानकों में कोई कमी रही है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

रोहित पवार ने कहा कि विमान दुर्घटना जैसी गंभीर घटनाओं को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखकर जांच की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि किसी भी तरह का संदेह खत्म हो सके।

विपक्ष का कहना है कि हादसे से जुड़े तकनीकी पहलुओं और कंपनी की भूमिका पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है। विमान हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने विमान सुरक्षा व्यवस्था और नियामक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। विपक्ष लगातार पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।