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डिएगो गार्सिया पर चर्चा
चागोस द्वीप समूह पर बढ़ा वैश्विक विवाद
डिएगो गार्सिया मुद्दे के बीच पीएम मोदी और मॉरीशस प्रधानमंत्री की अहम रणनीतिक वार्ता
21 Feb 2026, 11:39 AM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
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New Delhi डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विवाद के बीच भारत और मॉरीशस के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद ने अहम महत्व हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री Navinchandra Ramgoolam से मुलाकात कर द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब International Court of Justice (ICJ) ने चागोस द्वीप समूह को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चागोस द्वीप समूह, जिसमें Diego Garcia भी शामिल है, लंबे समय से ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच विवाद का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र का सामरिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थित है।

बैठक में दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। भारत ने मॉरीशस की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। साथ ही समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोकथाम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर सहमति बनी।

इसके अतिरिक्त व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने उभरती तकनीकों और ब्लू इकॉनमी के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया।

मॉरीशस हिंद महासागर में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ सुरक्षा सहयोग भी दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव है। हाल के वर्षों में भारत ने मॉरीशस में अवसंरचना, सामुद्रिक निगरानी और क्षमता निर्माण परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि डिएगो गार्सिया से जुड़ा विवाद वैश्विक शक्ति संतुलन से भी जुड़ा है। ऐसे में भारत का मॉरीशस के साथ संवाद बढ़ाना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

बैठक के बाद जारी बयान में दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। कुल मिलाकर यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने वाली है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सामरिक राजनीति में भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।