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NEET-UG परीक्षा सुधार पर नई बहस शुरू
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग उठी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई जनहित याचिका के बाद परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा और तकनीकी ढांचे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा प्रणाली में पेपर लीक और अनियमितताओं की आशंका बनी रहती है, जिससे करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसी कारण परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रणाली में बदलने की मांग को अब गंभीरता से देखा जा रहा है। यह मुद्दा केवल एक परीक्षा सुधार का नहीं बल्कि पूरे परीक्षा प्रबंधन ढांचे की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर नई जनहित याचिका
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें NEET-UG को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) प्रणाली में बदलने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली अपनाने से पेपर लीक, प्रश्नपत्र चोरी और भौतिक सुरक्षा में होने वाली चूक को काफी हद तक रोका जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में वितरण और सुरक्षा श्रृंखला कई स्तरों पर कमजोर हो सकती है, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इस याचिका के बाद कोर्ट की भूमिका को लेकर भी उम्मीदें बढ़ गई हैं कि वह परीक्षा सुधार की दिशा में कोई बड़ा निर्देश दे सकता है।
याचिकाकर्ताओं और विशेषज्ञों की भूमिका
इस याचिका को सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉक्टर ध्रुव और हरिशरण देवगन जैसे लोगों ने मिलकर दाखिल किया है। इसके साथ ही आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की भी इसमें भूमिका बताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए, ताकि बदलाव सिर्फ सुझाव तक सीमित न रह जाए। उनका मानना है कि NEET-UG जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही करोड़ों छात्रों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण वे इसे संस्थागत सुधार के रूप में देख रहे हैं।
CBT मॉडल और डिजिटल सुरक्षा की मांग
याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रणाली में बदलने के साथ-साथ प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग भी अनिवार्य की जाए। इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता को मजबूत किया जा सकेगा। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि डिजिटल सिस्टम अपनाने से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना काफी घट जाएगी। NEET-UG को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच यह प्रस्ताव परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हाई-लेवल निगरानी समिति की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन करे, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, शिक्षाविद, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक शामिल हों। इस समिति का उद्देश्य परीक्षा सुधार प्रक्रिया की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी बदलाव समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू हों। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि केवल तकनीकी बदलाव ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत निगरानी ढांचा भी जरूरी है। इससे NEET-UG की विश्वसनीयता को फिर से स्थापित किया जा सकता है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा और भविष्य
इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारत की परीक्षा प्रणाली की संरचना पर बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NEET-UG को डिजिटल और पारदर्शी मॉडल में बदला जाता है, तो यह देश की अन्य बड़ी परीक्षाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी ढांचे, इंटरनेट पहुंच और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान करना होगा। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे परीक्षा सुधार की प्रक्रिया को नई दिशा मिल सकती है।
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