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डॉक्टर अफजल नोटों पर लेटा
कानपुर पुलिस ने 31 मार्च को बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये गिरोह बिना अनुमति किडनी ट्रांसप्लांट का काम कर रहा था। जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी डॉक्टर अफजल अपने बिस्तर पर नोटों की गड्डियों के ऊपर लेटा हुआ था। वीडियो में वह नोटों को हाथ में रील बनवाते हुए दिखाई दे रहा है। पुलिस ने बताया कि यह वीडियो सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर तेजी से वायरल हुआ। इससे मामला और संवेदनशील हो गया है। आरोपियों की पहचान करने और डिजिटल ट्रैकिंग करने के लिए साइबर सेल को भी मामले में शामिल किया गया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डोनर खोजा
जांच में यह सामने आया कि गिरोह ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम का इस्तेमाल कर डोनर तलाशा। मेरठ के अल्फा अस्पताल से जुड़े यह नेटवर्क कानपुर तक फैल गया था। पुलिस ने बताया कि इसमें डोनर और रिसीवर के बीच ऑनलाइन संपर्क स्थापित किया जाता था। प्लेटफॉर्म पर मरीजों और उनके परिवार वालों को फर्जी जानकारी दी जाती थी। आरोपियों ने पैसों के लेन-देन को भी डिजिटल रूप में छुपाने की कोशिश की। साइबर जांच में कई डिजिटल चैट और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मिली। यह गिरोह लंबे समय से इस तरह के अपराध में संलिप्त था।
मेरठ अल्फा अस्पताल नोटिस जारी
मेरठ के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कटारिया ने अल्फा अस्पताल को नोटिस जारी किया है। अस्पताल को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में बताया गया है कि फिजियोथैरेपी और ओटी स्टाफ़ के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के संचालन और मरीजों के दस्तावेज़ की समीक्षा का आदेश दिया है। अस्पताल प्रशासन ने मामले में सहयोग का आश्वासन दिया है। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में कामकाज प्रभावित हुआ।
ओटी टेक्नीशियन ने किया ऑपरेशन
इस केस में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि कथित डॉक्टर मुदस्सर अली ने ऑपरेशन नहीं किया। पुलिस ने पाया कि असल में एक ओटी टेक्नीशियन ने किडनी ट्रांसप्लांट किया था। मरीजों और उनके परिवार को यह गलत जानकारी दी गई कि यह ऑपरेशन विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा किया गया। पुलिस ने अस्पताल के सारे रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी और मेडिकल लाइसेंस के अभाव में यह मामला गंभीर कानूनी उल्लंघन बन गया।
कानूनी कार्रवाई और CMO की निगरानी
कानपुर पुलिस ने पूरे गिरोह के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन कार्यालय की निगरानी में सभी आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है। गिरोह के खिलाफ आईपीसी और नेशनल ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत अलग-अलग धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मामले में सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्य को सीज किया गया। अधिकारियों ने कहा कि मामले की गहन जांच के बाद सभी दोषियों के खिलाफ अदालत में पेश किया जाएगा।
सोशल मीडिया और वायरल वीडियो का असर
डॉक्टर अफजल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। जनता ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले अपराध की चेतावनी भी दी। वायरल वीडियो से कानपुर और मेरठ में स्वास्थ्य प्रशासन की छवि प्रभावित हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने सभी सरकारी अस्पतालों में निगरानी बढ़ा दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल और मेडिकल दोनों स्तर पर कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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