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साइबर जागरूकता पर जोर
नाइजीरिया से संचालित फर्जी वेबसाइटों का खुलासा
जयपुर सम्मेलन में CJI सूर्य कांत का खुलासा, नाम से बनीं फर्जी वेबसाइटें और परिवार को संदेश
21 Feb 2026, 12:26 PM
Rajasthan -
Jaipur
Reporter :
Mahesh Sharma
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Jaipur जयपुर में आयोजित ‘साइबर सिक्योरिटी- अवेयरनेस, प्रोटेक्शन एंड इंक्लूसिव एक्सेस टू जस्टिस’ विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके नाम से नाइजीरिया में फर्जी वेबसाइटें बनाई गईं और इन साइट्स के माध्यम से उनके परिवारजनों को भी संदेश भेजे गए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डिजिटल युग में पहचान की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर दूसरे दिन यह जानकारी मिलती है कि उनके नाम और पद का दुरुपयोग कर कोई न कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी या फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल आम नागरिकों बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए भी चिंता का विषय है।
सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान CJI ने साइबर सुरक्षा को नागरिक शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि जब तक डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता को स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग जरूरी है। न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सम्मेलन के दौरान राजस्थान सरकार ने भी अहम घोषणा की। राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक विशेष साइबर कोर्ट स्थापित करने की बात कही, ताकि साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके। इस पहल को साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम से फर्जी वेबसाइट बनना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी कितनी तेजी से तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कड़े साइबर कानूनों की भूमिका अहम हो जाती है।
कुल मिलाकर, जयपुर में आयोजित यह सम्मेलन साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और न्याय व्यवस्था को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। CJI के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि साइबर खतरे किसी भी स्तर पर पहुंच सकते हैं और उनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डिजिटल युग में पहचान की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर दूसरे दिन यह जानकारी मिलती है कि उनके नाम और पद का दुरुपयोग कर कोई न कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी या फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल आम नागरिकों बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए भी चिंता का विषय है।
सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान CJI ने साइबर सुरक्षा को नागरिक शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि जब तक डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता को स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग जरूरी है। न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सम्मेलन के दौरान राजस्थान सरकार ने भी अहम घोषणा की। राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक विशेष साइबर कोर्ट स्थापित करने की बात कही, ताकि साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके। इस पहल को साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम से फर्जी वेबसाइट बनना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी कितनी तेजी से तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कड़े साइबर कानूनों की भूमिका अहम हो जाती है।
कुल मिलाकर, जयपुर में आयोजित यह सम्मेलन साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और न्याय व्यवस्था को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। CJI के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि साइबर खतरे किसी भी स्तर पर पहुंच सकते हैं और उनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।