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राहुल गांधी धमकी गिरफ्तार
राहुल गांधी को धमकी देने वाला गिरफ्तार
कोटा पुलिस ने वायरल वीडियो मामले में राहुल गांधी समेत 25 सांसदों को धमकी देने वाला युवक गिरफ्तार
20 Feb 2026, 02:15 PM
Rajasthan -
Kota
Reporter :
Mahesh Sharma
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Kota राजस्थान के कोटा शहर में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के मामले में कोटा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को हिरासत में लिया है। इस युवक ने वीडियो में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कुल 25 सांसदों को गोली मारने की धमकी दी थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी राज आमेर नाम का युवक पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में पहले से चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शहर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया।
एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेने के बाद विस्तृत पूछताछ जारी है। पुलिस ने बताया कि वीडियो में युवक ने स्पष्ट रूप से सांसदों के खिलाफ हिंसक धमकी दी थी। वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
इस मामले पर भाजपा कोटा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने बयान जारी किया और स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले युवक का पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियां निंदनीय हैं और कानून के तहत कार्रवाई होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो का वायरल होना गंभीर सुरक्षा खतरे को जन्म दे सकता है। सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि अब तक सांसदों की सुरक्षा में कोई खतरा नहीं है, लेकिन इस घटना ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता को और जरूरी बना दिया है।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी युवक की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया पोस्ट की जांच जारी है। इसके अलावा, वीडियो में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है।
राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं। विपक्ष और समर्थक दोनों ही इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाले धमकी भरे संदेशों की सतर्क निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
इस घटना ने यह भी साबित किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल सामग्री का प्रभाव केवल डिजिटल ही नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की सुरक्षा पर भी पड़ता है। पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक दलों की त्वरित कार्रवाई ने इस खतरे को रोका, और भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी राज आमेर नाम का युवक पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में पहले से चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शहर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया।
एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेने के बाद विस्तृत पूछताछ जारी है। पुलिस ने बताया कि वीडियो में युवक ने स्पष्ट रूप से सांसदों के खिलाफ हिंसक धमकी दी थी। वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
इस मामले पर भाजपा कोटा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने बयान जारी किया और स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले युवक का पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियां निंदनीय हैं और कानून के तहत कार्रवाई होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो का वायरल होना गंभीर सुरक्षा खतरे को जन्म दे सकता है। सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि अब तक सांसदों की सुरक्षा में कोई खतरा नहीं है, लेकिन इस घटना ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता को और जरूरी बना दिया है।
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी युवक की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया पोस्ट की जांच जारी है। इसके अलावा, वीडियो में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है।
राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं। विपक्ष और समर्थक दोनों ही इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाले धमकी भरे संदेशों की सतर्क निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
इस घटना ने यह भी साबित किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल सामग्री का प्रभाव केवल डिजिटल ही नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की सुरक्षा पर भी पड़ता है। पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक दलों की त्वरित कार्रवाई ने इस खतरे को रोका, और भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।