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भिवंडी में सियासी खेला
बीजेपी के बागी नारायण चौधरी मेयर निर्वाचित
भिवंडी मेयर चुनाव में सियासी उलटफेर, कांग्रेस समर्थन से बीजेपी बागी की जीत
21 Feb 2026, 10:44 AM
Maharashtra -
Bhiwandi
Reporter :
Mahesh Sharma
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Bhiwandi महाराष्ट्र के भिवंडी में महापौर चुनाव के दौरान बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। यहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को उस समय झटका लगा जब उसके बागी नेता Narayan Chaudhary कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थन से मेयर निर्वाचित हो गए। इस अप्रत्याशित परिणाम ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
शुक्रवार दोपहर 12 बजे Vilasrao Deshmukh Auditorium में मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। मतदान हाथ उठाकर कराया गया, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला। परिणाम सामने आते ही राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। भाजपा खेमे में इस नतीजे को लेकर असंतोष और हैरानी दोनों देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और एनसीपी ने भाजपा के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाई थी। एनसीपी (एसपी) के सांसद Suresh Mhatre, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, ने इस जीत को लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम स्थानीय स्तर पर जनता की भावना को दर्शाता है और भाजपा की नीतियों के खिलाफ एक संदेश है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल एक नगर निकाय का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी है। भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उसके ही बागी नेता ने विपक्षी दलों के समर्थन से सत्ता हासिल की है। इससे पार्टी के अंदर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस और एनसीपी के लिए यह परिणाम मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। दोनों दलों ने भाजपा को रोकने के लिए साझा मोर्चा बनाकर रणनीतिक बढ़त हासिल की। स्थानीय स्तर पर इसे ‘सेक्युलर फ्रंट’ की सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है।
नारायण चौधरी ने जीत के बाद कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य भिवंडी के विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने सभी दलों के पार्षदों को साथ लेकर चलने का भरोसा दिलाया और शहर की आधारभूत सुविधाओं, जल आपूर्ति, सड़क और स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
कुल मिलाकर, भिवंडी का यह मेयर चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में भाजपा इस घटनाक्रम पर क्या कदम उठाती है और विपक्षी दल इस बढ़त को किस तरह आगे बढ़ाते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
शुक्रवार दोपहर 12 बजे Vilasrao Deshmukh Auditorium में मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। मतदान हाथ उठाकर कराया गया, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला। परिणाम सामने आते ही राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। भाजपा खेमे में इस नतीजे को लेकर असंतोष और हैरानी दोनों देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और एनसीपी ने भाजपा के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाई थी। एनसीपी (एसपी) के सांसद Suresh Mhatre, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, ने इस जीत को लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम स्थानीय स्तर पर जनता की भावना को दर्शाता है और भाजपा की नीतियों के खिलाफ एक संदेश है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल एक नगर निकाय का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी है। भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उसके ही बागी नेता ने विपक्षी दलों के समर्थन से सत्ता हासिल की है। इससे पार्टी के अंदर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस और एनसीपी के लिए यह परिणाम मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। दोनों दलों ने भाजपा को रोकने के लिए साझा मोर्चा बनाकर रणनीतिक बढ़त हासिल की। स्थानीय स्तर पर इसे ‘सेक्युलर फ्रंट’ की सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है।
नारायण चौधरी ने जीत के बाद कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य भिवंडी के विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने सभी दलों के पार्षदों को साथ लेकर चलने का भरोसा दिलाया और शहर की आधारभूत सुविधाओं, जल आपूर्ति, सड़क और स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
कुल मिलाकर, भिवंडी का यह मेयर चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में भाजपा इस घटनाक्रम पर क्या कदम उठाती है और विपक्षी दल इस बढ़त को किस तरह आगे बढ़ाते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।