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ट्रंप का टैरिफ बम
सुप्रीम कोर्ट ने रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया
सुप्रीम कोर्ट झटके के बाद ट्रंप का 10% ग्लोबल टैरिफ ऐलान, भारत पर असर
21 Feb 2026, 10:28 AM
Washington -
Washougal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Washougal अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। US Supreme Court ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लागू किए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को अवैध करार देते हुए बड़ा झटका दिया। अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी, जिससे वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मच गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ कानूनी दायरे से बाहर थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक प्रतिबंधों को लागू करने के लिए उचित विधायी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने नई रणनीति के तहत सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% का समान ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह नया टैरिफ अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है। ट्रंप लंबे समय से ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत संरक्षणवादी रुख अपनाते रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और व्यापार घाटा कम होगा।
हालांकि, इस फैसले का असर भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों पर पड़ सकता है। भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी इस घोषणा के बाद अस्थिरता देखी गई। निवेशकों में चिंता बढ़ी है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध की स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। कई देशों ने इस कदम की समीक्षा करने और संभावित जवाबी कार्रवाई पर विचार करने के संकेत दिए हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा 10% समान टैरिफ लगाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ेगा। कंपनियों को उत्पादन लागत और कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे महंगाई और व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का यह नया कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य देश इस पर क्या रुख अपनाते हैं और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ कानूनी दायरे से बाहर थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक प्रतिबंधों को लागू करने के लिए उचित विधायी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने नई रणनीति के तहत सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% का समान ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह नया टैरिफ अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है। ट्रंप लंबे समय से ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत संरक्षणवादी रुख अपनाते रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और व्यापार घाटा कम होगा।
हालांकि, इस फैसले का असर भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों पर पड़ सकता है। भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी इस घोषणा के बाद अस्थिरता देखी गई। निवेशकों में चिंता बढ़ी है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध की स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। कई देशों ने इस कदम की समीक्षा करने और संभावित जवाबी कार्रवाई पर विचार करने के संकेत दिए हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा 10% समान टैरिफ लगाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ेगा। कंपनियों को उत्पादन लागत और कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे महंगाई और व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का यह नया कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य देश इस पर क्या रुख अपनाते हैं और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।