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मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण में व्यापारियों ने उन अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है, जिनके खिलाफ कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई थी। व्यापारियों का कहना था कि कोर्ट के आदेश पर ज़ब उनके व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई हो रही है तो फिर अफसरों को क्यों छोड़ा जा रहा है।
पहले एक नजर पूरे मामले पर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2025 में आवास एवं विकास परिषद के 67 अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश किए थे। नौचंदी थाने में दो एफआईआर दर्ज कराई गई। पहली एफआईआर में 45 और दूसरी में 22 अफसरों के नाम शामिल किए गए थे।
एसएसपी को दी पूरे मामले की जानकारी संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने एसएसपी अविनाश पांडे को बताया कि अक्टूबर, 2025 में यह दोनों मुकदमे दर्ज हुए थे। आवास एवं विकास परिषद के 67 इंजीनियरों के नाम इसमें शामिल हैं लेकिन थाना पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर रही है। व्यापारियों ने पूछा कि जिन अफसरों की वजह से व्यापारियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है, उनको पुलिस राहत क्यों दे रही है।
एसएसपी ने दिलाया कार्रवाई का भरोसा एसएसपी अविनाश पांडे ने व्यापारियों से लगभग 15 मिनट बातचीत की। व्यापारियों के द्वारा उनको एक ज्ञापन भी दिया गया जिसे एसएसपी ने संबंधित क्षेत्राधिकार को मार्क कर दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह जल्द इस मामले में विवेचक को बुलाकर बात करेंगे और अपडेट लेंगे।
अधिशासी अभियंता ने दर्ज कराई रिपोर्ट तत्कालीन अधिशासी अभियंता आफताब अहमद की ओर से यह दोनों एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पहली एफआईआर में 22 नाम थे जिनमे 07 अवर अभियंता, 05 सहायक अभियंता, 03 अधीक्षण अभियंता, 04 अधिशासी अभियंता और 03 मुख्य अभियंता के नाम शामिल हैं।
दूसरी एफआईआर में 45 नाम शामिल अधिशासी अभियंता आफताब अहमद की तहरीर पर जो दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है उसमें कुल 45 अफसरों के नाम हैं। इनमें 9 अधीक्षण अभियंता, 7 अधिशासी अभियंता, 14 सहायक अभियंता और 15 अवर अभियंता शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से 14 अभियंता रिटायर्ड हो चुके हैं।
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