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करियर बदलाव
शुरुआती दौर में बहुत कम फीस मिलती थी।
संघर्ष से सफलता तक अरशद वारसी की कहानी सर्किट किरदार ने बदली पूरी पहचान और कमाई
21 Feb 2026, 04:49 PM
Maharashtra -
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
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Mumbai मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता Arshad Warsi ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों और सफलता की कहानी को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फिल्मों से बहुत कम कमाई होती थी। लेकिन फिल्म Munna Bhai M.B.B.S. में निभाए गए "सर्किट" के किरदार ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
अरशद वारसी ने एक बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत के दिनों में उन्हें बहुत कम मेहनताना मिलता था। कई बार तो फिल्मों से होने वाली आय इतनी कम होती थी कि आर्थिक स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय वह मुश्किल से कुछ हजार रुपये कमा पाते थे और नियमित काम भी नहीं मिल पाता था।
उन्होंने बताया कि फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने "सर्किट" का किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। फिल्म की सफलता के बाद उनकी पहचान एक मजबूत कॉमिक और कैरेक्टर अभिनेता के रूप में स्थापित हो गई।
अरशद ने कहा कि इस फिल्म के बाद उनकी मांग तेजी से बढ़ी और उन्हें फिल्मों में बेहतर भूमिकाएं मिलने लगीं। इसके साथ ही उनकी फीस में भी बड़ा बदलाव आया। उन्होंने बताया कि मुन्नाभाई एमबीबीएस की सफलता के बाद उन्होंने पहली बार एक फिल्म के लिए करीब एक करोड़ रुपये तक की फीस ली।
अभिनेता ने यह भी बताया कि शुरुआत में वह खुद अपनी फीस को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं करते थे और यह काम उनके मैनेजर संभालते थे। लेकिन जैसे-जैसे उनका करियर आगे बढ़ा, उन्हें अपने काम की कीमत समझ में आने लगी।
उन्होंने कहा कि संघर्ष का दौर किसी भी कलाकार के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और उसी से सीख लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। अरशद के अनुसार सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे कई सालों की मेहनत और धैर्य होता है।
आज अरशद वारसी बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेताओं में गिने जाते हैं और कई यादगार फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं। उनका "सर्किट" किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है और सोशल मीडिया पर उससे जुड़े संवाद और दृश्य अक्सर चर्चा में रहते हैं।
अरशद वारसी की यह कहानी फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे नए कलाकारों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है, जो मेहनत और धैर्य के दम पर सफलता हासिल करना चाहते हैं।
अरशद वारसी ने एक बातचीत में बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत के दिनों में उन्हें बहुत कम मेहनताना मिलता था। कई बार तो फिल्मों से होने वाली आय इतनी कम होती थी कि आर्थिक स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय वह मुश्किल से कुछ हजार रुपये कमा पाते थे और नियमित काम भी नहीं मिल पाता था।
उन्होंने बताया कि फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने "सर्किट" का किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। फिल्म की सफलता के बाद उनकी पहचान एक मजबूत कॉमिक और कैरेक्टर अभिनेता के रूप में स्थापित हो गई।
अरशद ने कहा कि इस फिल्म के बाद उनकी मांग तेजी से बढ़ी और उन्हें फिल्मों में बेहतर भूमिकाएं मिलने लगीं। इसके साथ ही उनकी फीस में भी बड़ा बदलाव आया। उन्होंने बताया कि मुन्नाभाई एमबीबीएस की सफलता के बाद उन्होंने पहली बार एक फिल्म के लिए करीब एक करोड़ रुपये तक की फीस ली।
अभिनेता ने यह भी बताया कि शुरुआत में वह खुद अपनी फीस को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं करते थे और यह काम उनके मैनेजर संभालते थे। लेकिन जैसे-जैसे उनका करियर आगे बढ़ा, उन्हें अपने काम की कीमत समझ में आने लगी।
उन्होंने कहा कि संघर्ष का दौर किसी भी कलाकार के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और उसी से सीख लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। अरशद के अनुसार सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे कई सालों की मेहनत और धैर्य होता है।
आज अरशद वारसी बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेताओं में गिने जाते हैं और कई यादगार फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं। उनका "सर्किट" किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है और सोशल मीडिया पर उससे जुड़े संवाद और दृश्य अक्सर चर्चा में रहते हैं।
अरशद वारसी की यह कहानी फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे नए कलाकारों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है, जो मेहनत और धैर्य के दम पर सफलता हासिल करना चाहते हैं।