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42 विधायकों को हाईकोर्ट नोटिस
शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में बिहार के 42 विधायकों को नोटिस जारी
शपथपत्र विवाद में बिहार के 42 विधायकों को पटना हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
19 Feb 2026, 05:16 PM
Bihar -
Patna
Reporter :
Mahesh Sharma
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Patna बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब Patna High Court ने राज्य के 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। मामला चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर आवश्यक जानकारी पूर्ण रूप से नहीं दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित विधायकों ने नामांकन के समय अपने शपथपत्र में कुछ जानकारियां छुपाईं या आवश्यक कॉलम अधूरे छोड़े। इसके बावजूद संबंधित निर्वाची पदाधिकारी ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया। इसी आधार पर चुनाव में पराजित प्रत्याशियों और कुछ मतदाताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता शशि भूषण मंगलम ने बताया कि अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए नोटिस जारी किया है और संबंधित विधायकों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि क्या शपथपत्र में दी गई जानकारी पूरी और सत्य थी या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी शपथपत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। उम्मीदवारों के लिए अपनी संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य जरूरी जानकारियों का खुलासा करना अनिवार्य है। यदि इसमें कोई कमी पाई जाती है तो नामांकन की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
इस घटनाक्रम से बिहार विधानसभा की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दल इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कुछ सत्ताधारी नेताओं का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत को शपथपत्र में गंभीर त्रुटियां मिलती हैं, तो संबंधित विधायकों की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के विस्तृत परीक्षण और सुनवाई के बाद ही होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
फिलहाल, सभी की निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। 42 विधायकों के भविष्य पर फैसला अब न्यायिक प्रक्रिया के हाथों में है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित विधायकों ने नामांकन के समय अपने शपथपत्र में कुछ जानकारियां छुपाईं या आवश्यक कॉलम अधूरे छोड़े। इसके बावजूद संबंधित निर्वाची पदाधिकारी ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया। इसी आधार पर चुनाव में पराजित प्रत्याशियों और कुछ मतदाताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता शशि भूषण मंगलम ने बताया कि अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए नोटिस जारी किया है और संबंधित विधायकों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि क्या शपथपत्र में दी गई जानकारी पूरी और सत्य थी या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी शपथपत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। उम्मीदवारों के लिए अपनी संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य जरूरी जानकारियों का खुलासा करना अनिवार्य है। यदि इसमें कोई कमी पाई जाती है तो नामांकन की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
इस घटनाक्रम से बिहार विधानसभा की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दल इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कुछ सत्ताधारी नेताओं का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत को शपथपत्र में गंभीर त्रुटियां मिलती हैं, तो संबंधित विधायकों की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के विस्तृत परीक्षण और सुनवाई के बाद ही होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
फिलहाल, सभी की निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। 42 विधायकों के भविष्य पर फैसला अब न्यायिक प्रक्रिया के हाथों में है।