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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का केंद्र बना होर्मुज जलडमरूमध्य
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। यह संकरा समुद्री रास्ता न सिर्फ तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर करती है। हाल के वर्षों में ईरान, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते टकराव ने इस क्षेत्र को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। लेकिन मौजूदा तनाव के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इस रणनीतिक इलाके के मूल निवासी कौन थे और वे यहां से क्यों चले गए।
प्राचीन काल में विविध समुदायों का था यहां निवास
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि हॉर्मुज क्षेत्र में सदियों पहले विभिन्न समुदायों का निवास था। खास तौर पर 10वीं से 17वीं सदी के बीच यहां एक समृद्ध राज्य विकसित हुआ था जिसे ‘हॉर्मुज का राज्य’ कहा जाता था। इस क्षेत्र में फारसी, अरब और हिंद महासागर के व्यापारी समुदाय रहते थे। यह इलाका व्यापार, संस्कृति और समुद्री गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुका था। यहां की समृद्धि और भौगोलिक स्थिति ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अहम हिस्सा बना दिया था, जिससे यहां के निवासियों का जीवन भी काफी विकसित और संपन्न था।
व्यापारिक महत्व के कारण बना शक्तियों का निशाना
हॉर्मुज की सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति रही है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, जिससे होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का परिवहन होता है। इसी कारण यह क्षेत्र हमेशा से बड़ी शक्तियों के निशाने पर रहा है। व्यापारिक नियंत्रण और समुद्री कर वसूली के लिए कई विदेशी ताकतों ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश की। धीरे-धीरे स्थानीय शासकों की शक्ति कमजोर पड़ने लगी और बाहरी ताकतों का प्रभाव बढ़ता गया, जिससे मूल निवासियों का सामाजिक और आर्थिक ढांचा प्रभावित हुआ।
पुर्तगाली कब्जे ने बदल दिया क्षेत्र का स्वरूप
16वीं सदी में पुर्तगालियों ने हॉर्मुज द्वीप पर कब्जा कर लिया, जिसने इस क्षेत्र की दिशा और दशा दोनों बदल दी। 1515 से 1622 तक पुर्तगालियों ने यहां शासन किया और ‘कार्टाज’ नामक समुद्री कर प्रणाली लागू की। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों और निवासियों पर भारी दबाव पड़ा। विदेशी शासन और आर्थिक शोषण के चलते कई स्थानीय समुदायों ने इस क्षेत्र को छोड़ना शुरू कर दिया। इससे हॉर्मुज का पारंपरिक सामाजिक ढांचा टूट गया और क्षेत्र की जनसंख्या में भी बड़ा बदलाव आया।
स्थानीय निवासियों के पलायन के पीछे कई कारण
हॉर्मुज के मूल निवासियों के पलायन के पीछे केवल विदेशी कब्जा ही कारण नहीं था। लगातार युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक शोषण ने भी लोगों को मजबूर किया कि वे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करें। इसके अलावा, व्यापारिक मार्गों में बदलाव और नई समुद्री तकनीकों के विकास ने भी इस क्षेत्र की अहमियत को कुछ समय के लिए कम कर दिया था। इन सभी कारणों ने मिलकर हॉर्मुज को एक समय के समृद्ध केंद्र से संघर्षरत क्षेत्र में बदल दिया, जिससे यहां के मूल निवासी धीरे-धीरे बिखर गए।
आज भी वैश्विक राजनीति में अहम बना हुआ क्षेत्र
आज के समय में भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत कम नहीं हुई है। यह क्षेत्र अब भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां होने वाली किसी भी हलचल का असर सीधे वैश्विक बाजारों और राजनीति पर पड़ता है। यही कारण है कि आज भी बड़ी शक्तियां इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती हैं। हालांकि, इसके मूल निवासियों का इतिहास अब केवल किताबों में सिमटकर रह गया है, लेकिन उनकी विरासत और इस क्षेत्र का महत्व आज भी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।
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