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एआई रोजगार आर्थिक प्रभाव
AI से रोजगार बदलेंगे IMF प्रमुख ने राय दी
IMF प्रमुख: एआई नौकरियों के लिए सकारात्मक लेकिन सावधानी जरूरी
20 Feb 2026, 12:59 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने हाल ही में भारत में इंडिया टुडे के सहयोगी चैनल के साथ बातचीत में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रोजगार और वैश्विक आर्थिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक दुनिया के कई देशों में नौकरियों और कामकाज के स्वरूप को बदल रही है, और इसके असर को समझने के लिए गार्डरेल्स यानी नियामक ढांचे की आवश्यकता है।
जॉर्जीवा ने बातचीत में बताया कि एआई कई क्षेत्रों में कार्यक्षमता बढ़ा रही है और नई नौकरियों के अवसर भी पैदा कर रही है। उन्होंने कहा, "एआई सिर्फ नौकरियों को खतरे में नहीं डाल रही, बल्कि नई आर्थिक संभावनाओं और स्किल्स के अवसर भी बना रही है। यदि देशों ने सही नीति और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए, तो यह सकारात्मक साबित हो सकता है।"
IMF प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नौकरी खोने वालों और नए अवसरों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश-विशेष गाइडलाइन और प्रशिक्षण योजनाओं के जरिए एआई के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
जॉर्जीवा ने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक आर्थिक विकास पर एआई का सकारात्मक असर हो सकता है, लेकिन इसके लिए नीति निर्माताओं और कंपनियों को रणनीतिक कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, "अगर सही दिशा में निवेश और प्रशिक्षण किया जाए, तो एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था में नई वृद्धि दिखाई दे सकती है।"
उन्होंने यह भी बताया कि कई विकसित और विकासशील देशों ने एआई को अपनाने के साथ-साथ रोजगार संरचना में बदलाव के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि समाज में डिजिटल और तकनीकी साक्षरता भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्जीवा के विचार विश्व स्तर पर एआई के प्रभाव और नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी दोनों के रूप में देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिना नियामक ढांचे और प्रशिक्षण के एआई तकनीक के नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे नौकरी की असमानता, कौशल अंतराल और सामाजिक आर्थिक दबाव।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की इस रिपोर्ट और जॉर्जीवा के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि एआई के कारण आने वाले सालों में रोजगार का स्वरूप बदलने वाला है, और सरकारों, कंपनियों और कर्मचारियों को इसके लिए पहले से तैयार रहना होगा।
जॉर्जीवा ने बातचीत में बताया कि एआई कई क्षेत्रों में कार्यक्षमता बढ़ा रही है और नई नौकरियों के अवसर भी पैदा कर रही है। उन्होंने कहा, "एआई सिर्फ नौकरियों को खतरे में नहीं डाल रही, बल्कि नई आर्थिक संभावनाओं और स्किल्स के अवसर भी बना रही है। यदि देशों ने सही नीति और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए, तो यह सकारात्मक साबित हो सकता है।"
IMF प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नौकरी खोने वालों और नए अवसरों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश-विशेष गाइडलाइन और प्रशिक्षण योजनाओं के जरिए एआई के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
जॉर्जीवा ने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक आर्थिक विकास पर एआई का सकारात्मक असर हो सकता है, लेकिन इसके लिए नीति निर्माताओं और कंपनियों को रणनीतिक कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, "अगर सही दिशा में निवेश और प्रशिक्षण किया जाए, तो एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था में नई वृद्धि दिखाई दे सकती है।"
उन्होंने यह भी बताया कि कई विकसित और विकासशील देशों ने एआई को अपनाने के साथ-साथ रोजगार संरचना में बदलाव के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि समाज में डिजिटल और तकनीकी साक्षरता भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्जीवा के विचार विश्व स्तर पर एआई के प्रभाव और नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी दोनों के रूप में देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिना नियामक ढांचे और प्रशिक्षण के एआई तकनीक के नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे नौकरी की असमानता, कौशल अंतराल और सामाजिक आर्थिक दबाव।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की इस रिपोर्ट और जॉर्जीवा के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि एआई के कारण आने वाले सालों में रोजगार का स्वरूप बदलने वाला है, और सरकारों, कंपनियों और कर्मचारियों को इसके लिए पहले से तैयार रहना होगा।