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IEEPA पर कानूनी बहस
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया
IEEPA के सहारे टैरिफ वार, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की आपात शक्तियों पर लगाई लगाम
21 Feb 2026, 11:16 AM
Washington -
Washougal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Washougal अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लागू करने के लिए इस्तेमाल किया गया International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) अपने मूल उद्देश्य से परे जाकर प्रयोग किया गया था। इस फैसले ने कार्यपालिका की आपातकालीन शक्तियों की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।
IEEPA वर्ष 1977 में लागू किया गया एक संघीय कानून है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में विदेशी संस्थाओं, सरकारों या व्यक्तियों के साथ आर्थिक लेनदेन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य मुख्यतः राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था को असाधारण खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
ट्रंप प्रशासन ने इसी कानून का हवाला देते हुए कई देशों पर व्यापक टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका के व्यापार घाटे और विदेशी प्रतिस्पर्धा से राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा को खतरा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि IEEPA का इस्तेमाल सामान्य व्यापारिक मतभेदों के समाधान के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, इस कानून के तहत घोषित आपातकाल की प्रकृति स्पष्ट और वास्तविक होनी चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह फैसला अमेरिकी संविधान में शक्तियों के विभाजन (separation of powers) के सिद्धांत को मजबूत करता है। व्यापार को विनियमित करने की प्राथमिक शक्ति कांग्रेस के पास है, और राष्ट्रपति द्वारा व्यापक टैरिफ लागू करना विधायी अधिकारों के दायरे में हस्तक्षेप माना गया।
इस निर्णय के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। वैश्विक व्यापार जगत में जहां पहले ट्रंप की टैरिफ नीति से अनिश्चितता बढ़ी थी, वहीं अब अदालत के हस्तक्षेप से कुछ स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है। कई देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप कदम बताया है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह फैसला भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के प्रयोग पर न्यायिक निगरानी को और सख्त कर सकता है। इससे कार्यपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने अमेरिकी व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। यह फैसला न केवल ट्रंप प्रशासन के लिए झटका है, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक ढांचे में शक्ति संतुलन की पुनः पुष्टि भी है।
IEEPA वर्ष 1977 में लागू किया गया एक संघीय कानून है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में विदेशी संस्थाओं, सरकारों या व्यक्तियों के साथ आर्थिक लेनदेन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य मुख्यतः राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था को असाधारण खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
ट्रंप प्रशासन ने इसी कानून का हवाला देते हुए कई देशों पर व्यापक टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका के व्यापार घाटे और विदेशी प्रतिस्पर्धा से राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा को खतरा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि IEEPA का इस्तेमाल सामान्य व्यापारिक मतभेदों के समाधान के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, इस कानून के तहत घोषित आपातकाल की प्रकृति स्पष्ट और वास्तविक होनी चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह फैसला अमेरिकी संविधान में शक्तियों के विभाजन (separation of powers) के सिद्धांत को मजबूत करता है। व्यापार को विनियमित करने की प्राथमिक शक्ति कांग्रेस के पास है, और राष्ट्रपति द्वारा व्यापक टैरिफ लागू करना विधायी अधिकारों के दायरे में हस्तक्षेप माना गया।
इस निर्णय के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। वैश्विक व्यापार जगत में जहां पहले ट्रंप की टैरिफ नीति से अनिश्चितता बढ़ी थी, वहीं अब अदालत के हस्तक्षेप से कुछ स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है। कई देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप कदम बताया है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह फैसला भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के प्रयोग पर न्यायिक निगरानी को और सख्त कर सकता है। इससे कार्यपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने अमेरिकी व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। यह फैसला न केवल ट्रंप प्रशासन के लिए झटका है, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक ढांचे में शक्ति संतुलन की पुनः पुष्टि भी है।