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धरने पर बैठे कर्मचारी, वेतन बढ़ाने की मांग
ग्रेटर नोएडा में एक निजी विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में कर्मचारियों और घरेलू कामगारों के प्रदर्शन के बाद अब विश्वविद्यालय स्टाफ भी इसी राह पर चल पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं है और महंगाई के दौर में गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी परिसर के बाहर इकट्ठा होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ओवरटाइम भुगतान दोगुना करने की मांग तेज
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि के साथ-साथ ओवरटाइम का भुगतान दोगुना करना शामिल है। उनका आरोप है कि उनसे अतिरिक्त समय तक काम कराया जाता है, लेकिन उसके अनुरूप भुगतान नहीं किया जाता। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि कई बार उन्हें निर्धारित समय से अधिक काम करना पड़ता है, जिससे उनका निजी जीवन प्रभावित होता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि उनके अतिरिक्त श्रम का उचित मूल्यांकन हो। इस मांग को लेकर कर्मचारियों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है और वे इसे लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
सरकारी आदेशों का हवाला देकर उठाई मांग
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से पहले ही वेतन बढ़ाने और ओवरटाइम भुगतान को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आदेशों को नजरअंदाज कर रहा है। इसी वजह से उन्हें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो इस तरह के आंदोलन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इस मुद्दे ने अब एक बड़े प्रशासनिक सवाल का रूप ले लिया है।
प्रदर्शन के चलते बढ़ा तनाव, पुलिस तैनात
प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है।
प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत की कोशिश
स्थिति को सुलझाने के लिए प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों से बातचीत की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है that संवाद के जरिए ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी मांगों पर चर्चा की जा रही है। हालांकि अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, लेकिन बातचीत का दौर जारी है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई मध्य रास्ता निकलेगा, जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हो सकें।
आंदोलन का असर शिक्षा व्यवस्था पर संभव
यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है, तो इसका असर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति से प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ सकती है और छात्रों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इस विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और कर्मचारी किस तरह इस स्थिति को संभालते हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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