Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
टैरिफ विवाद में कोर्ट झटका
छह जजों ने ट्रंप टैरिफ नीति को असंवैधानिक बताया
टैरिफ मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ट्रंप नियुक्त जजों ने भी नहीं दिया साथ
21 Feb 2026, 02:25 PM
Washington -
Washougal
Reporter :
Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
Washougal अमेरिका में वैश्विक रेसिप्रोकल टैरिफ नीति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए इस नीति के प्रमुख प्रावधानों को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले ने न केवल ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव भी बढ़ा दिया है।
इस फैसले की खास बात यह रही कि जिन जजों की नियुक्ति स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप ने की थी, उनमें से भी दो जजों ने उनके आदेश के खिलाफ फैसला दिया। केवल एक जज ने ही राष्ट्रपति के पक्ष में समर्थन जताया। इस घटनाक्रम को अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता का संदेश भी गया है।
सुप्रीम कोर्ट के नौ सदस्यीय पीठ में से छह जजों ने माना कि टैरिफ नीति लागू करने के तरीके और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं। अदालत का मानना है कि व्यापार से जुड़े इतने बड़े फैसलों में स्पष्ट कानूनी आधार और संतुलन आवश्यक है।
फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अदालत का निर्णय देश के आर्थिक हितों के खिलाफ है। उन्होंने विशेष रूप से उन जजों पर नाराजगी जताई जिन्होंने इस नीति का विरोध किया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें कुछ जजों से ऐसे फैसले की उम्मीद नहीं थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह निर्णय अमेरिकी संविधान में शक्तियों के संतुलन को दर्शाता है। राष्ट्रपति को आर्थिक नीति बनाने का अधिकार जरूर है, लेकिन उसे कानून के दायरे में रहकर लागू करना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस फैसले का असर अमेरिका की वैश्विक व्यापार नीति पर पड़ सकता है। कई देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल पहले ही ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति की आलोचना कर रहे हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ नीति को लेकर नई रणनीति बनाने की जरूरत सामने आ गई है। ट्रंप प्रशासन अब कानूनी विकल्पों और संशोधित प्रस्तावों पर विचार कर सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले को ध्यान से देखा जा रहा है।
इस फैसले की खास बात यह रही कि जिन जजों की नियुक्ति स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप ने की थी, उनमें से भी दो जजों ने उनके आदेश के खिलाफ फैसला दिया। केवल एक जज ने ही राष्ट्रपति के पक्ष में समर्थन जताया। इस घटनाक्रम को अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता का संदेश भी गया है।
सुप्रीम कोर्ट के नौ सदस्यीय पीठ में से छह जजों ने माना कि टैरिफ नीति लागू करने के तरीके और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं। अदालत का मानना है कि व्यापार से जुड़े इतने बड़े फैसलों में स्पष्ट कानूनी आधार और संतुलन आवश्यक है।
फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अदालत का निर्णय देश के आर्थिक हितों के खिलाफ है। उन्होंने विशेष रूप से उन जजों पर नाराजगी जताई जिन्होंने इस नीति का विरोध किया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें कुछ जजों से ऐसे फैसले की उम्मीद नहीं थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह निर्णय अमेरिकी संविधान में शक्तियों के संतुलन को दर्शाता है। राष्ट्रपति को आर्थिक नीति बनाने का अधिकार जरूर है, लेकिन उसे कानून के दायरे में रहकर लागू करना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस फैसले का असर अमेरिका की वैश्विक व्यापार नीति पर पड़ सकता है। कई देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल पहले ही ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति की आलोचना कर रहे हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ नीति को लेकर नई रणनीति बनाने की जरूरत सामने आ गई है। ट्रंप प्रशासन अब कानूनी विकल्पों और संशोधित प्रस्तावों पर विचार कर सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले को ध्यान से देखा जा रहा है।