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बयान से बढ़ा राजनीतिक ताप
नेता प्रतिपक्ष और मंत्री आमने-सामने माफी पर भी तकरार
औकात टिप्पणी पर घमासान तेज विधानसभा विवाद ने पकड़ा व्यक्तिगत हमलों का रंग
21 Feb 2026, 01:22 PM Madhya Pradesh - Bhopal
Reporter : Mahesh Sharma
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Bhopal मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘औकात’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाज़ी और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। सदन में हुई तीखी नोकझोंक के बाद यह मुद्दा मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी गरमा गया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही।

विवाद तब शुरू हुआ जब वरिष्ठ मंत्री Kailash Vijayvargiya ने नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar को लेकर ‘औकात’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा हुआ। स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने हस्तक्षेप किया और मामले पर खेद जताया।

हालांकि, विवाद यहीं शांत नहीं हुआ। मीडिया से बातचीत के दौरान विजयवर्गीय का अंदाज हल्का और बेबाक नजर आया। उन्होंने कहा, “कई बार हो जाता है यार… कप्तान ने माफी मांग ली तो क्या हो गया।” उनके इस बयान ने विपक्ष को और आक्रामक कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह रवैया सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पलटवार करते हुए मंत्री पर तंज कसा और कहा कि उन्हें अब “पहलवानी छोड़कर संयम सीखना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवादों को जन्म दे रही है। सिंघार ने यह भी कहा कि राज्य में चल रहे महत्वपूर्ण विषयों—जैसे औद्योगिक समझौते और नागरिक समस्याएं—पर चर्चा से बचने के लिए राजनीतिक बयानबाज़ी की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में भाषा और आचरण को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला व्यक्तिगत टिप्पणी तक पहुंच गया है। इससे सदन की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल दोनों प्रभावित हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि मंत्री को स्पष्ट माफी मांगनी चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया मुद्दा बता रहा है।

सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं का तर्क है कि मुख्यमंत्री द्वारा खेद जताने के बाद विवाद को समाप्त मान लेना चाहिए। वहीं विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि जिम्मेदारी व्यक्तिगत टिप्पणी करने वाले पर तय होनी चाहिए।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्ष आपसी संवाद से स्थिति सामान्य कर पाते हैं या फिर यह विवाद और लंबा खिंचता है। विधानसभा की गरिमा और राजनीतिक शालीनता पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।