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मशहूर हस्ती पर फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव को लगाई फटकार
सांप जहर प्रकरण में एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार
20 Feb 2026, 04:18 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
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New Delhi नई दिल्ली। सांप और जहर प्रकरण में यूट्यूबर Elvish Yadav को Supreme Court of India से कड़ी फटकार मिली है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही मशहूर क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

एल्विश यादव ने इस मामले में दर्ज चार्जशीट और आपराधिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन पर सांपों के इस्तेमाल और कथित तौर पर जहर से जुड़े प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का आरोप है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि लोकप्रिय हस्तियों को ऐसे “बेबस और बिना आवाज वाले जानवरों” का इस तरह इस्तेमाल करने की छूट दी जाएगी, तो इसका गलत संदेश जाएगा।

पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि जो मन करेगा वह करेंगे।” अदालत ने यह भी पूछा कि क्या संबंधित वीडियो में सांप को खुद हैंडल किया गया था और क्या इसके लिए विधिवत अनुमति ली गई थी। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है कि शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भले ही एफआईआर के स्तर पर कोई कार्रवाई समाप्त हो जाए, लेकिन यदि मामला Wildlife Protection Act के दायरे में आता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने वन्यजीवों के संरक्षण को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मामले की अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट करना होगा कि आरोपों की जांच किस स्तर पर है और क्या संबंधित गतिविधि के लिए प्रशासनिक अनुमति प्राप्त की गई थी। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद इस प्रकरण ने एक बार फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी और कानूनी दायित्वों पर बहस छेड़ दी है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट निर्माण की सीमाओं और जवाबदेही को भी रेखांकित करता है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मामलों में अदालतें पहले भी सख्त रुख अपनाती रही हैं।

फिलहाल एल्विश यादव की याचिका पर अंतिम निर्णय आना बाकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि वन्यजीवों के संरक्षण और कानून के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।