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स्वामी गोविंद देव का विवाद पर बयान
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद ने फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने पत्रकारों से कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद अब मथुरा में भी इसी तरह का मंदिर स्थापित होगा। महाराज ने बताया कि वे श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल धार्मिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकता का भी है।
अयोध्या के अनुभव का हवाला
स्वामी ने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे वहाँ वर्षों के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद राम मंदिर स्थापित हुआ। उन्होंने दावा किया कि मथुरा में भी कानूनी प्रक्रिया और समाजिक समर्थन के माध्यम से कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण संभव है। उनके अनुसार, यह न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी विषय है। उन्होंने कहा कि लोगों का समर्थन और न्यायपालिका की मदद से यह सपना जल्द ही साकार होगा।
देश को बांटने की साजिश का जिक्र
गोविंद देव महाराज ने कहा कि पिछले 150-200 सालों से भारत को खान-पान, जाति, भाषा और संप्रदायों के आधार पर बांटने की कोशिशें होती रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन्मभूमि विवाद केवल मंदिर-मस्जिद का मामला नहीं है, बल्कि देश की एकता और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी सवाल है। महाराज का कहना था कि अयोध्या की तरह मथुरा में भी सही दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
कानूनी लड़ाई और ट्रस्ट की भूमिका
महाराज ने बताया कि कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जमीन के मामले, धार्मिक अनुष्ठान और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विवाद को लेकर किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि न्यायपालिका के आदेश और समाजिक समर्थन से मंदिर निर्माण संभव होगा।
धार्मिक और सामाजिक संदेश
स्वामी गोविंद देव महाराज ने जनता से अपील की कि वे विवाद में शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल केवल पूजा और भक्ति का केंद्र होना चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक या सामाजिक द्वेष की वजह से जनता में तनाव नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से समाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।
भविष्य की योजनाओं का संकेत
महाराज ने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया कि ट्रस्ट जल्द ही कानूनी और धार्मिक कदमों के साथ मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या के अनुभव से सीख लेकर इस बार सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। उनका दावा था कि जल्द ही मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए रास्ता साफ होगा और यह ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी।
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