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ट्रंप को कानूनी झटका
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप का टैरिफ आदेश खारिज किया
नील कात्याल की दलीलों से सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ फैसले पर बड़ा झटका
21 Feb 2026, 10:37 AM
New York -
New York City
Reporter :
Mahesh Sharma
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New York City अमेरिका की सर्वोच्च अदालत में हाल ही में हुए टैरिफ विवाद में प्रमुख वकील Neal Katyal चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए आपातकालीन टैरिफ के खिलाफ जोरदार पैरवी करते हुए अदालत को यह विश्वास दिलाया कि यह फैसला संवैधानिक सीमाओं से परे था। अंततः US Supreme Court ने ट्रंप प्रशासन के टैरिफ आदेश को निरस्त कर दिया।
कात्याल ने अदालत के समक्ष दलील दी कि अमेरिकी संविधान के अनुसार व्यापार को विनियमित करने की शक्ति कांग्रेस के पास है। उन्होंने तर्क दिया कि आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति द्वारा व्यापक टैरिफ लागू करना शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत के खिलाफ है। उनका कहना था कि इस तरह का कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर देता है और कार्यपालिका को असाधारण अधिकार दे देता है।
नील कात्याल अमेरिकी कानूनी जगत का जाना-माना नाम हैं। वे वर्तमान में मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर हैं और Georgetown University Law Center में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। संवैधानिक और जटिल वाणिज्यिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता मानी जाती है। उन्होंने पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रभावशाली दलीलें दी हैं।
विशेष रूप से, कात्याल ओबामा प्रशासन के दौरान कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं। Barack Obama ने उन्हें 2010 में इस पद पर नियुक्त किया था। इस भूमिका में उन्होंने सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की। यही अनुभव इस मामले में भी उनके पक्ष को मजबूत बनाने में सहायक रहा।
टैरिफ विवाद में उनका मुख्य तर्क यह था कि आपातकालीन कानून का इस्तेमाल केवल वास्तविक राष्ट्रीय संकट की स्थिति में किया जाना चाहिए, न कि सामान्य व्यापारिक मतभेदों के समाधान के लिए। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यदि कार्यपालिका को बिना सीमाओं के ऐसे अधिकार दे दिए जाएं, तो यह संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कई विशेषज्ञ अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन और नियंत्रण (checks and balances) की जीत मान रहे हैं। इस निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों पर नई बहस छिड़ गई है।
नील कात्याल की भूमिका ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संवैधानिक कानून के क्षेत्र में उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। आने वाले समय में भी वे अमेरिका की प्रमुख कानूनी बहसों में अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।
कात्याल ने अदालत के समक्ष दलील दी कि अमेरिकी संविधान के अनुसार व्यापार को विनियमित करने की शक्ति कांग्रेस के पास है। उन्होंने तर्क दिया कि आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति द्वारा व्यापक टैरिफ लागू करना शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत के खिलाफ है। उनका कहना था कि इस तरह का कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर देता है और कार्यपालिका को असाधारण अधिकार दे देता है।
नील कात्याल अमेरिकी कानूनी जगत का जाना-माना नाम हैं। वे वर्तमान में मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर हैं और Georgetown University Law Center में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। संवैधानिक और जटिल वाणिज्यिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता मानी जाती है। उन्होंने पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रभावशाली दलीलें दी हैं।
विशेष रूप से, कात्याल ओबामा प्रशासन के दौरान कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं। Barack Obama ने उन्हें 2010 में इस पद पर नियुक्त किया था। इस भूमिका में उन्होंने सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की। यही अनुभव इस मामले में भी उनके पक्ष को मजबूत बनाने में सहायक रहा।
टैरिफ विवाद में उनका मुख्य तर्क यह था कि आपातकालीन कानून का इस्तेमाल केवल वास्तविक राष्ट्रीय संकट की स्थिति में किया जाना चाहिए, न कि सामान्य व्यापारिक मतभेदों के समाधान के लिए। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यदि कार्यपालिका को बिना सीमाओं के ऐसे अधिकार दे दिए जाएं, तो यह संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कई विशेषज्ञ अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन और नियंत्रण (checks and balances) की जीत मान रहे हैं। इस निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों पर नई बहस छिड़ गई है।
नील कात्याल की भूमिका ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संवैधानिक कानून के क्षेत्र में उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। आने वाले समय में भी वे अमेरिका की प्रमुख कानूनी बहसों में अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।