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देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ते हुए देश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपने दायरे में ले लिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य और पूर्वी भारत में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश का दायरा तेजी से विस्तारित हुआ है। बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मानसूनी बादलों की मौजूदगी ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिलने लगी है। मौसम विभाग का कहना है कि वातावरणीय परिस्थितियां फिलहाल मानसून के पक्ष में बनी हुई हैं, जिसके चलते अगले कुछ दिनों में और अधिक क्षेत्रों तक इसकी पहुंच संभव है। इस बदलाव का असर कृषि गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है और किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं।
अगले दो दिन रहेंगे महत्वपूर्ण
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 48 घंटे मानसून की प्रगति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण बादलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि कई राज्यों में व्यापक वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून को और आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। यदि यही स्थिति जारी रहती है तो उत्तर और पश्चिम भारत के कुछ और हिस्सों में भी मानसून का प्रवेश तेज गति से हो सकता है। इससे जलाशयों के स्तर में सुधार और कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुंबई में झमाझम बारिश का असर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सोमवार सुबह से ही बारिश का सिलसिला देखने को मिला। कई इलाकों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया। गर्मी और उमस से राहत मिलने के साथ ही लोगों ने सुहावने मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में जलभराव और यातायात की धीमी रफ्तार जैसी समस्याएं भी सामने आईं। नगर प्रशासन ने स्थिति पर निगरानी बनाए रखी और संवेदनशील इलाकों में आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इससे शहर के तापमान में और गिरावट आ सकती है।
कृषि और जलस्रोतों के लिए राहत
मानसून की प्रगति केवल मौसम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध कृषि और जल प्रबंधन से भी है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय से वर्षा की कमी बनी हुई थी, वहां अब खेतों को पर्याप्त नमी मिलने लगी है। इससे धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिल सकती है। जलाशयों, तालाबों और नदियों के जलस्तर में भी सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून सामान्य बना रहता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सकारात्मक लाभ मिल सकता है। किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी
जहां एक ओर बारिश लोगों को राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में सावधानी बरतने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। भारी वर्षा के दौरान जलभराव, बिजली बाधित होने और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासन ने नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। विशेष रूप से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। आपदा प्रबंधन दल भी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखे गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
देशभर में मौसम बदलाव के संकेत
मानसून की मौजूदा प्रगति यह संकेत दे रही है कि देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है। जहां कुछ दिन पहले तक भीषण गर्मी और लू का असर था, वहीं अब बारिश और ठंडी हवाओं ने राहत पहुंचानी शुरू कर दी है। मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर अपडेट जारी किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में देश के कई अन्य क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे न केवल कृषि बल्कि पेयजल और पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिलेगा।
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