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साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा
Gujarat पुलिस ने राज्य में चल रहे बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई “म्यूल हंट 2.0” अभियान के तहत की गई, जिसका उद्देश्य साइबर अपराध से जुड़े गिरोहों पर शिकंजा कसना है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। अधिकारियों के मुताबिक इस गिरोह ने करीब 613 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों और संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ इस तरह के अपराधों में भी तेजी आई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस कई अहम सुराग जुटाने में लगी हुई है।
कम पढ़े-लिखे आरोपी भी बने साइबर नेटवर्क का हिस्सा
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि गिरफ्तार आरोपियों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने केवल आठवीं तक पढ़ाई की थी। अधिकारियों का कहना है कि कम शिक्षा होने के बावजूद आरोपी साइबर अपराध के तरीकों को तेजी से सीख रहे थे और संगठित नेटवर्क के जरिए लोगों को निशाना बना रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराध अब केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग और मोबाइल तकनीक के जरिए आम लोग भी इस तरह के गिरोहों का हिस्सा बन रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लोगों की निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल कर उन्हें फोन कॉल और डिजिटल माध्यमों से धोखा देते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी कमीशन के आधार पर काम करते थे और अलग-अलग स्तर पर उनकी भूमिकाएं तय थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और इसके तार किन राज्यों से जुड़े हैं। फिलहाल इस मामले ने साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सोशल इंजीनियरिंग से लोगों को बनाया शिकार
जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह पहले बैंक ग्राहकों की जानकारी जुटाता था, जिसमें मोबाइल नंबर, ग्राहक आईडी और अन्य निजी डाटा शामिल होता था। इसके बाद आरोपी खुद को बैंक अधिकारी या किसी संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी में अपराधी लोगों का विश्वास जीतकर उनसे ओटीपी, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर खातों से पैसे ट्रांसफर करवाते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में लोगों को फर्जी लिंक भेजे गए और नकली वेबसाइट्स के जरिए जानकारी चुराई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण लोग आसानी से ऐसे जाल में फंस जाते हैं। फिलहाल पुलिस नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर भरोसा न करने की अपील कर रही है।
4 से 8 प्रतिशत कमीशन पर होता था काम
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे साइबर ठगी के बदले 4 से 8 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह में शामिल अलग-अलग लोगों को उनकी भूमिका के अनुसार भुगतान किया जाता था। कुछ लोग बैंक खाते उपलब्ध करवाते थे, जबकि कुछ कॉलिंग और तकनीकी काम संभालते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराध अब संगठित आर्थिक नेटवर्क का रूप लेता जा रहा है, जहां हर व्यक्ति की अलग जिम्मेदारी होती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी फर्जी दस्तावेजों और कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर पैसों को अलग-अलग जगह ट्रांसफर करते थे ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। पुलिस अब उन खातों और लेनदेन की भी जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल इस नेटवर्क में किया गया। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाए जाएंगे ताकि ऐसे नेटवर्क को समय रहते खत्म किया जा सके। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।
साइबर अपराध रोकने को पुलिस की बड़ी कार्रवाई
“म्यूल हंट 2.0” अभियान को गुजरात पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जो साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते और अन्य संसाधन उपलब्ध करवाते हैं। पुलिस का कहना है कि कई बार लोग लालच में आकर अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं, जो बाद में साइबर ठगी में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराध की जांच पारंपरिक अपराधों की तुलना में अधिक जटिल होती है क्योंकि इसमें डिजिटल ट्रेल, फर्जी पहचान और कई राज्यों के नेटवर्क शामिल होते हैं। पुलिस अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल डाटा और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध के खिलाफ और सख्त अभियान चलाए जाएंगे। फिलहाल इस कार्रवाई को राज्य में साइबर सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने लोगों से ऑनलाइन लेनदेन के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी, ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाते हैं और आम लोगों को भावनात्मक या तकनीकी भ्रम में डालकर ठगी करते हैं। पुलिस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए। डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अब हर नागरिक की जिम्मेदारी बन गई है। फिलहाल गुजरात में सामने आए इस बड़े साइबर फ्रॉड मामले ने यह साफ कर दिया है कि जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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