Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
टैरिफ में बड़ा उतार-चढ़ाव
सुप्रीम कोर्ट निर्णय के बाद भारत को राहत
अमेरिकी फैसले के बाद भारत पर टैरिफ दर घटकर 18 प्रतिशत, व्यापार वार्ता फिर तेज
21 Feb 2026, 01:07 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT Sponsored
Ad
Open
New Delhi भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच टैरिफ दरों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा पहले 25 प्रतिशत और बाद में 50 प्रतिशत तक बढ़ाए गए आयात शुल्क को अब घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और दोनों देशों के बीच पुनः शुरू हुई व्यापार वार्ता के बाद सामने आया है।

पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ नीति को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था। खासकर रूसी तेल की खरीद और व्यापार संतुलन के मुद्दे पर भारत समेत कई देशों पर कड़े आयात शुल्क लगाए गए थे। भारत पर पहले 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गया था और प्रस्तावित ट्रेड डील की बातचीत भी अटक गई थी।

हालांकि, हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने टैरिफ नीति की समीक्षा की। जानकारी के अनुसार, अदालत में कानूनी चुनौती मिलने के बाद प्रशासन ने वैकल्पिक प्रावधानों के तहत 10 प्रतिशत के वैश्विक टैरिफ ढांचे का सहारा लिया, जबकि भारत के मामले में संशोधित दर 18 प्रतिशत तय की गई। इसे दोनों देशों के बीच जारी वार्ता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि 50 प्रतिशत की दर भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका थी। इंजीनियरिंग सामान, फार्मा उत्पाद, वस्त्र और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों पर इसका सीधा असर पड़ा था। अब 18 प्रतिशत की दर अपेक्षाकृत राहत देने वाली मानी जा रही है, हालांकि यह पहले की 25 प्रतिशत दर से भी कम है और व्यापार संतुलन की दिशा में एक मध्य मार्ग का संकेत देती है।

नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच हाल के दौर की बातचीत में बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, ऊर्जा आयात और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष एक “राजनीतिक रूप से स्वीकार्य” समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे व्यापार युद्ध जैसी स्थिति को टाला जा सके।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ में यह कमी वैश्विक बाजारों को भी सकारात्मक संदेश दे सकती है। यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आगे बढ़ता है, तो द्विपक्षीय व्यापार में स्थिरता आने की संभावना है। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 18 प्रतिशत की यह दर स्थायी रहेगी या भविष्य में फिर कोई संशोधन देखने को मिलेगा।

कुल मिलाकर, टैरिफ के उतार-चढ़ाव के बाद अब दोनों देशों के रिश्तों में नरमी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।