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दवा खर्च बढ़ने पर जांच शुरू
कैंसर मरीजों की दवाओं में अनियमितता की आशंका से मचा हड़कंप, मेडिकल संस्थान में करोड़ों रुपये के खर्च पर उठे गंभीर सवाल
01 Jun 2026, 02:04 PM Uttar Pradesh - Lucknow
Reporter : Mahesh Sharma
Lucknow

दवा खर्च में बढ़ोतरी से उठे सवाल

राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में कैंसर मरीजों के लिए खरीदी जाने वाली महंगी दवाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। शुरुआती जांच में दवा खरीद और उपयोग के आंकड़ों में असामान्य अंतर दिखाई देने पर अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। बताया जा रहा है कि कुछ महीनों के भीतर दवाओं पर होने वाला खर्च अचानक कई गुना बढ़ गया, जिससे वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू की गई। संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की संख्या और दवाओं की वास्तविक खपत के बीच तालमेल को लेकर कई प्रश्न सामने आए हैं। इसी कारण पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।

जांच टीम ने खंगाले पुराने रिकॉर्ड

मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वितरण से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी गई। जांच टीम बीते कई महीनों के आंकड़ों का मिलान कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दवाओं की खरीद और मरीजों को वितरण के बीच कोई विसंगति तो नहीं है। अधिकारियों के अनुसार कई दस्तावेजों को पुनः सत्यापित किया जा रहा है और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच के दौरान यह देखने का प्रयास किया जा रहा है कि दवाओं की मांग, आपूर्ति और उपयोग की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी दवाओं की खरीद में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है क्योंकि इससे सीधे मरीजों के उपचार और सरकारी संसाधनों पर प्रभाव पड़ता है।

अचानक बढ़े खर्च ने बढ़ाई चिंता

जांच के दौरान सामने आए वित्तीय आंकड़ों ने अधिकारियों की चिंता और बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले तक दवा खपत पर होने वाला मासिक खर्च अपेक्षाकृत सीमित था, लेकिन बाद के महीनों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसी असामान्य बढ़ोतरी ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा। अधिकारियों का मानना है कि खर्च में इतनी बड़ी वृद्धि के पीछे के कारणों को समझना बेहद जरूरी है। यदि यह वृद्धि मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण हुई है तो उसके पर्याप्त रिकॉर्ड मौजूद होने चाहिए, लेकिन यदि दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है। इसी कारण प्रत्येक खरीद आदेश, वितरण रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की विस्तार से जांच की जा रही है।

संविदाकर्मियों पर भी गिरी कार्रवाई

प्रारंभिक जांच के दौरान दवा वितरण काउंटर पर तैनात कुछ संविदाकर्मियों को उनके वर्तमान कार्यस्थल से हटा दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। संबंधित कर्मचारियों को अन्य प्रशासनिक कार्यों में समायोजित किया गया है ताकि जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई को किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक एहतियाती कदम है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संस्थान प्रबंधन ने यह भी कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

मरीजों के हितों को रखा गया सर्वोपरि

स्वास्थ्य संस्थान प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच का असर मरीजों के उपचार पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं पहले की तरह उपलब्ध कराई जाती रहेंगी। अधिकारियों ने कहा कि मरीजों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक जांच से चिकित्सा सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी होती है तो इससे भविष्य में स्वास्थ्य संस्थानों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी।

रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी

जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं और दस्तावेजी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जनता का विश्वास जुड़ा होता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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