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ट्रंप टैरिफ सुप्रीम कोर्ट रद्द
US Supreme Court फैसला भारत समेत कई देशों को टैरिफ रिफंड
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया ट्रंप टैरिफ अब अमेरिका करेगा वैश्विक व्यापारियों को रिफंड
21 Feb 2026, 02:35 PM
Washington -
Washougal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Washougal अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद अब अमेरिका उन देशों को टैरिफ रिफंड देगा, जिन पर इन शुल्कों का प्रभाव पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने वैश्विक व्यापार में नई हलचल पैदा कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाने में अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया और इसके लिए संसद से विशेष अनुमति आवश्यक थी, जो अनुपस्थित थी। इस फैसले का असर सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जापान, यूरोपीय संघ (EU), दक्षिण कोरिया, ब्राज़ील और कनाडा जैसे देशों पर भी पड़ेगा।
भारत के व्यापारियों के लिए यह एक राहत की खबर है। पिछले कुछ सालों में अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। अब अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ रिफंड मिलने से व्यापारियों को आर्थिक राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अमेरिकी व्यापार नीति में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के जरिए अनुमान लगाया था कि अमेरिका को अगले एक दशक में खरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया। अमेरिकी व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हित में यह फैसला भी माना जा रहा है, क्योंकि गैरकानूनी टैरिफ से उनकी कीमतें बढ़ी थीं।
इस फैसले के बाद अमेरिका के वित्त विभाग ने संकेत दिया है कि रिफंड प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक देश के निर्यातकों को उनके भुगतान के अनुपात में राशि वापस की जाएगी। भारत के उद्योग संगठन और व्यापार संघ इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि वे तुरंत रिफंड प्रक्रिया को ट्रैक करें।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक व्यापारिक रिश्तों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। इससे अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो सकता है और भविष्य में कानूनी रूप से सुरक्षित व्यापार नीतियां लागू होंगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद भारत, ब्राज़ील, जापान और अन्य प्रभावित देशों के निर्यातकों को राहत मिली है। भारत सरकार ने भी व्यापारियों से कहा है कि वे अपने रिकॉर्ड अपडेट रखें और अमेरिकी अधिकारियों से रिफंड की प्रक्रिया में सहयोग करें।
इस तरह, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल अमेरिकी कानून की मजबूती दर्शाता है, बल्कि वैश्विक व्यापार में न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाने में अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया और इसके लिए संसद से विशेष अनुमति आवश्यक थी, जो अनुपस्थित थी। इस फैसले का असर सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जापान, यूरोपीय संघ (EU), दक्षिण कोरिया, ब्राज़ील और कनाडा जैसे देशों पर भी पड़ेगा।
भारत के व्यापारियों के लिए यह एक राहत की खबर है। पिछले कुछ सालों में अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। अब अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ रिफंड मिलने से व्यापारियों को आर्थिक राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अमेरिकी व्यापार नीति में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के जरिए अनुमान लगाया था कि अमेरिका को अगले एक दशक में खरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया। अमेरिकी व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हित में यह फैसला भी माना जा रहा है, क्योंकि गैरकानूनी टैरिफ से उनकी कीमतें बढ़ी थीं।
इस फैसले के बाद अमेरिका के वित्त विभाग ने संकेत दिया है कि रिफंड प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक देश के निर्यातकों को उनके भुगतान के अनुपात में राशि वापस की जाएगी। भारत के उद्योग संगठन और व्यापार संघ इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि वे तुरंत रिफंड प्रक्रिया को ट्रैक करें।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक व्यापारिक रिश्तों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। इससे अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो सकता है और भविष्य में कानूनी रूप से सुरक्षित व्यापार नीतियां लागू होंगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद भारत, ब्राज़ील, जापान और अन्य प्रभावित देशों के निर्यातकों को राहत मिली है। भारत सरकार ने भी व्यापारियों से कहा है कि वे अपने रिकॉर्ड अपडेट रखें और अमेरिकी अधिकारियों से रिफंड की प्रक्रिया में सहयोग करें।
इस तरह, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल अमेरिकी कानून की मजबूती दर्शाता है, बल्कि वैश्विक व्यापार में न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।