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अमाल मलिक ने खोली इंडस्ट्री की सच्चाई
Amaal Mallik ने भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की एक कड़वी सच्चाई को सामने रखा है। उन्होंने बताया कि बड़े-बड़े हिट गाने बनाने के बावजूद सिंगर्स और कंपोजर्स को उनकी मेहनत के मुताबिक कमाई नहीं मिलती। उनका कहना है कि सिस्टम में खामियां हैं, जिसके चलते असली क्रिएटर्स को उनका हक नहीं मिल पाता। इस खुलासे के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री में रॉयल्टी को लेकर बहस तेज हो गई है।
100 करोड़ कमाने वाला गाना, कम मिला हिस्सा
अमाल मलिक ने उदाहरण देते हुए फिल्म Roy के गाने Sooraj Dooba Hain का जिक्र किया। इस गाने ने कुल मिलाकर करीब 100 करोड़ रुपये की कमाई की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बहुत कम रकम मिली। उन्होंने बताया कि इतने बड़े हिट के बाद भी उनकी कमाई उम्मीद से बेहद कम रही, जो इस सिस्टम की असमानता को दर्शाता है।
रॉयल्टी सिस्टम लागू, फिर भी समस्या बरकरार
अमाल के मुताबिक, भारत में 2020 से रॉयल्टी सिस्टम लागू तो हो गया है, लेकिन इसकी पूरी तरह से सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। गानों के मास्टर राइट्स अक्सर म्यूजिक कंपनियों के पास होते हैं, जिससे कलाकारों को सीमित हिस्सा ही मिलता है। यह स्थिति कई कलाकारों के लिए निराशाजनक है, क्योंकि उनकी मेहनत का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता।
प्रोडक्शन खर्च के बाद बचता है कम पैसा
अमाल मलिक ने बताया कि किसी गाने के निर्माण में कई तरह के खर्च होते हैं, जैसे रिकॉर्डिंग, म्यूजिशियंस की फीस और अन्य तकनीकी खर्च। इन सबको चुकाने के बाद उनके पास बहुत कम पैसा बचता है। उन्होंने कहा कि एक बड़े हिट गाने के बावजूद उनकी व्यक्तिगत कमाई काफी सीमित रह जाती है, जो इंडस्ट्री के मौजूदा ढांचे पर सवाल खड़े करती है।
म्यूजिक कंपनियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मुद्दे में म्यूजिक कंपनियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अधिकतर मामलों में गानों के अधिकार कंपनियों के पास होते हैं, जिससे वे कमाई का बड़ा हिस्सा अपने पास रखती हैं। T-Series जैसी बड़ी कंपनियां इंडस्ट्री में प्रमुख भूमिका निभाती हैं, लेकिन कलाकारों के हिस्से को लेकर पारदर्शिता की कमी की बात सामने आती रही है।
सिस्टम में बदलाव की जरूरत महसूस
अमाल मलिक के इस बयान के बाद यह बहस फिर से तेज हो गई है कि म्यूजिक इंडस्ट्री में सुधार की जरूरत है। कलाकारों को उनका उचित हक मिले, इसके लिए रॉयल्टी सिस्टम को और पारदर्शी और मजबूत बनाना जरूरी है। यह मुद्दा न केवल सिंगर्स और कंपोजर्स बल्कि पूरी इंडस्ट्री के भविष्य से जुड़ा हुआ है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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