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SZN MEDIA, मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपराध की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में लोहियानगर क्षेत्र के अल्लीपुर इलाके में एक मकान के तहखाने में चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का सरगना रहीमुद्दीन समेत 10 आरोपी अभी फरार हैं। इस खुलासे ने न केवल एक बड़े अवैध नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तहखाने में चल रही थी पिस्टल बनाने की फैक्ट्री
पुलिस की छापेमारी के दौरान एक मकान के कमरे में डबल-बेड के नीचे बने तहखाने से अवैध हथियार बनाने का पूरा सेटअप बरामद हुआ। मौके से 11 तैयार पिस्टल, 12 मैगजीन और हथियार बनाने के उपकरण मिले हैं। पुलिस के अनुसार यह फैक्ट्री पिछले तीन महीनों से संचालित हो रही थी और ऑन-डिमांड हथियार तैयार कर अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे।
150 से ज्यादा पिस्टल सप्लाई करने का खुलासा
मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने हाल ही में 150 से अधिक अवैध पिस्टलों की सप्लाई की है। यह हथियार विभिन्न अपराधियों तक उनकी मांग के अनुसार पहुंचाए जा रहे थे।
पुलिस अब इन हथियारों के खरीदारों की पहचान कर रही है और उन्हें भी मामले में शामिल करने की तैयारी कर रही है।
गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
स्वाट और सर्विलांस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि लोहियानगर क्षेत्र में अवैध हथियारों का कारोबार हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने घोसीपुर कट के पास दबिश देकर तीन आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
रफ्तार आरोपियों में असलम, अलाउद्दीन, अनस, शक्ति, मुनीर, आरिश, शिवा शर्मा, गुड्डू सैनी, राजन और रजत शर्मा शामिल हैं, जो लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
सरगना के घर से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का मास्टरमाइंड रहीमुद्दीन अपने अल्लीपुर स्थित मकान के तहखाने में इस अवैध फैक्ट्री को चला रहा था। उसके साथ कई अन्य आरोपी भी सक्रिय रूप से हथियार बनाने और सप्लाई करने में लगे थे I
फिलहाल रहीमुद्दीन समेत 10 आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने स्थानीय थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन महीने तक इतने बड़े स्तर पर अवैध हथियारों का निर्माण और सप्लाई होती रही, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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