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वैश्विक सैन्य खर्च में तेज बढ़ोतरी
साल 2025 में दुनिया भर में सैन्य खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें कई देशों ने अपने रक्षा बजट को तेजी से बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, जिसके कारण देशों ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। युद्ध, सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनावों ने इस वृद्धि को और तेज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई विकसित और विकासशील देशों ने अपनी रक्षा रणनीतियों में बदलाव करते हुए आधुनिक हथियारों और तकनीक पर भारी निवेश किया है।
भारत का रक्षा बजट रिकॉर्ड स्तर पर
रिपोर्ट के अनुसार भारत का सैन्य खर्च वर्ष 2025 में बढ़कर लगभग 8.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इस वृद्धि के साथ भारत दुनिया के शीर्ष पांच सबसे बड़े रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल रहा है। बढ़ते सुरक्षा जोखिम, सीमावर्ती तनाव और आधुनिक युद्ध तकनीक की आवश्यकता ने इस बजट वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। भारत ने अपने रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाएं और खरीद प्रक्रियाएं तेज की हैं।
आधुनिक रक्षा तकनीक पर जोर बढ़ा
भारत ने हाल के समय में अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। इसमें ड्रोन तकनीक, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, एयर डिफेंस नेटवर्क और अत्याधुनिक हथियारों की खरीद शामिल है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते युद्ध परिदृश्य में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ तकनीकी श्रेष्ठता भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी कारण रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा आधुनिक तकनीक और अनुसंधान पर खर्च किया जा रहा है। इससे भारतीय सेना की क्षमता और अधिक मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
वैश्विक शक्तियों का बढ़ता सैन्य खर्च
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिका, चीन और रूस दुनिया के सबसे अधिक रक्षा खर्च करने वाले देश बने हुए हैं। इन तीनों देशों का संयुक्त सैन्य खर्च वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। अमेरिका ने अपने परमाणु और पारंपरिक हथियारों पर निवेश बढ़ाया है, जबकि चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। रूस का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है, खासकर मौजूदा भू-राजनीतिक हालातों के कारण। यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर रही है।
क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव
एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में सैन्य खर्च में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। यूरोप में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि एशिया और ओशिनिया क्षेत्र में भी रक्षा खर्च तेजी से बढ़ा है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष, मध्य पूर्व की अस्थिरता और एशिया में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने देशों को अपने रक्षा बजट बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और देश अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं।
भारत की सुरक्षा रणनीति और भविष्य की दिशा
भारत का बढ़ता रक्षा बजट यह दर्शाता है कि देश अपनी सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है। सीमावर्ती सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और आधुनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का ध्यान स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर और अधिक केंद्रित होगा। यह बदलाव न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि देश की आर्थिक और तकनीकी क्षमता को भी नई दिशा देगा।
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