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नकवी ने अयातुल्ला खामेनेई को दी श्रद्धांजलि
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता Mukhtar Abbas Naqvi सोमवार को दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे और ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर नकवी ने कहा कि दिवंगत खामेनेई के योगदान और उनके नेतृत्व ने ईरान के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को आकार दिया। उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाते हुए दोनों देशों के बीच मित्रता और पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। नकवी ने कहा कि इस प्रकार के शिष्टाचार न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं बल्कि दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच समझ और सम्मान को भी बढ़ाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हमेशा से शांतिप्रिय दृष्टिकोण अपनाता आया है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में सामरिक समाधान और बातचीत को प्राथमिकता देता है।
भारत की ओर से संवेदनाएं व्यक्त कीं
नकवी ने ईरानी राजदूत से मुलाकात की और भारत की ओर से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। नकवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस समय अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में शांति और संवाद की आवश्यकता अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई केवल तनाव बढ़ाती है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित होती है। नकवी ने स्पष्ट किया कि भारत अपने मित्र देशों के साथ सहयोग और समन्वय बढ़ाने पर विश्वास करता है और इस प्रकार की पहलें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं।
युद्ध को बताया अंतरराष्ट्रीय समस्या
मुख्तार अब्बास नकवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी तस्वीरें साझा करते हुए युद्ध की निंदा की। उन्होंने लिखा कि युद्ध केवल विनाश फैलाता है और यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर समस्या बन चुका है। नकवी ने कहा कि इस प्रकार के संघर्ष से केवल निर्दोष नागरिक प्रभावित होते हैं और यह वैश्विक शांति के लिए खतरा उत्पन्न करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध के बजाय कूटनीतिक संवाद और समझौते को बढ़ावा देना चाहिए। उनके इस संदेश को देखते हुए राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसे भारत की शांतिप्रिय और जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी के विचारों को दोहराया
नकवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को दोहराते हुए कहा कि 'बुद्ध की भूमि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है।' उन्होंने कहा कि भारत की नीति में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष को बढ़ावा देना शामिल नहीं है। इसके बजाय भारत हमेशा कूटनीतिक और शांतिप्रिय समाधान के पक्ष में रहा है। नकवी ने यह भी कहा कि भारत अपने विदेश नीति में सदैव संतुलन और न्याय के सिद्धांतों को महत्व देता रहा है और अंतरराष्ट्रीय विवादों में केवल संवाद और सहयोग के रास्ते अपनाने पर जोर देता है।
राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व
मुख्तार अब्बास नकवी की यह पहल राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस तरह की पहल से भारत-ईरान संबंधों में स्थिरता और भरोसा बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा दे सकता है। इस मुलाकात से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी मजबूती मिली है, खासकर उस समय जब मध्य पूर्व में तनावपूर्ण परिस्थितियां बनी हुई हैं।
भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नकवी के इस कदम से भारत और ईरान के बीच भविष्य में सहयोग और संवाद को नई दिशा मिलेगी। इससे केवल राजनयिक संबंध मजबूत नहीं होंगे बल्कि व्यापारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ सकता है। इस प्रकार की पहलें यह संदेश देती हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार और शांतिप्रिय भूमिका निभा रहा है।
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