Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
असम में घुसपैठ का मुद्दा क्यों खास
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का मानना है कि राज्य में घुसपैठ का मुद्दा देश के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि यहां यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। गुवाहाटी में दिए गए अपने बयान में उन्होंने इस विषय पर विस्तार से बात की।
‘मियां’ और अन्य मुस्लिम समुदाय में अंतर
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में मुस्लिम समुदाय को एकसमान नहीं देखा जा सकता। उन्होंने ‘मियां’ मुस्लिम और अन्य स्थानीय मुस्लिम समुदायों के बीच अंतर बताया। उनके अनुसार, यह विभाजन राज्य की राजनीति और सामाजिक संरचना को प्रभावित करता है और इसी वजह से घुसपैठ का मुद्दा यहां अलग रूप लेता है।
बीजेपी को मुस्लिम वोट मिलने का दावा
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि असम में बीजेपी को मुस्लिम समुदाय का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि राज्य के कई स्थानीय मुसलमान सरकार की नीतियों से संतुष्ट हैं और वे विकास के मुद्दों पर पार्टी का साथ दे रहे हैं।
राजनीतिक दलों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
असम में घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा को और तेज कर रहा है। एक तरफ बीजेपी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति में लगातार बहस और टकराव की स्थिति बनी हुई है।
कानूनी प्रक्रिया और चुनौतियां बनीं बड़ी बाधा
हिमंता बिस्वा सरमा ने माना कि घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया और मौजूदा नियमों के कारण कई बार कार्रवाई में कठिनाई आती है। इस वजह से इस समस्या का समाधान जटिल हो जाता है।
आने वाले चुनावों में मुद्दा बनेगा अहम
आगामी चुनावों में असम में घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख भूमिका निभा सकता है। हिमंता बिस्वा सरमा के बयान के बाद यह स्पष्ट है कि यह विषय राजनीतिक एजेंडे में बना रहेगा और चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करेगा।
Latest News
Open