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सेना को मिला बड़ा तकनीकी हथियार
भारतीय सेना की ताकत को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब सेना के टैंक युद्ध के मैदान में पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और तेज गति से आगे बढ़ सकेंगे। इसके लिए स्वदेशी तकनीक से विकसित एक खास ‘ट्रॉल सिस्टम’ को शामिल किया जा रहा है, जो बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने में सक्षम है। यह सिस्टम खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जहां दुश्मन ने जमीन के नीचे विस्फोटक बिछा रखे हों। इस नई तकनीक के आने से सेना की रणनीतिक बढ़त और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
DRDO की स्वदेशी तकनीक का कमाल
यह अत्याधुनिक ट्रॉल सिस्टम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह टैंकों के आगे लगकर रास्ते में मौजूद बारूदी सुरंगों को पहले ही नष्ट कर देता है, जिससे टैंक और उसमें बैठे सैनिक सुरक्षित रहते हैं। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम न केवल सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि युद्ध के दौरान सेना की गति और आक्रामक क्षमता को भी नई दिशा देगा।
BEML और उद्योगों के साथ समझौता
इस परियोजना के तहत भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड और एक निजी कंपनी के साथ समझौता किया गया है, जिससे इस सिस्टम का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा सके। रक्षा मंत्रालय ने इस डील को नई दिल्ली में अंतिम रूप दिया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी से न केवल रक्षा उत्पादन को गति मिलेगी, बल्कि देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही, यह कदम भारत को रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
टैंकों की ताकत और रफ्तार बढ़ेगी
इस नए ट्रॉल सिस्टम को T-72 टैंक और T-90 टैंक जैसे मुख्य युद्धक टैंकों में लगाया जाएगा। इसके लगने के बाद ये टैंक बिना रुके और बिना खतरे के दुश्मन के इलाके में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। खास बात यह है कि पहले जहां बारूदी सुरंगों के कारण टैंकों की गति धीमी हो जाती थी, अब यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे सेना की आक्रामक रणनीति को भी मजबूती मिलेगी और युद्ध के दौरान समय की बचत होगी।
युद्ध के हालात में बड़ा बदलाव संभव
बारूदी सुरंगें किसी भी युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती होती हैं, क्योंकि ये सैनिकों और वाहनों दोनों के लिए खतरनाक साबित होती हैं। ऐसे में यह नया सिस्टम युद्ध के हालात को पूरी तरह बदल सकता है। इससे न केवल सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि मिशन को तेजी से पूरा करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के आने से भारतीय सेना को दुश्मन के खिलाफ बढ़त मिलेगी और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
यह परियोजना भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक बड़ा उदाहरण है। स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से न केवल विदेशी निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के भीतर ही उच्च स्तर की तकनीक विकसित करने का रास्ता भी खुलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बने और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरे। यह ट्रॉल सिस्टम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो भविष्य में सेना की ताकत को और बढ़ाएगा।
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