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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली राहत
नेपाल की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आया जब केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। अदालत ने दोनों नेताओं की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और सरकार व विपक्ष के बीच तनाव बना हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत को आगे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं बचा है, इसलिए दोनों को जमानत दी जाती है। इस निर्णय के बाद समर्थकों में खुशी की लहर देखी गई, वहीं राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हिरासत अवधि खत्म होने पर लिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि काठमांडू की निचली अदालत द्वारा बढ़ाई गई पांच दिन की हिरासत अवधि पूरी हो चुकी है और अब आगे हिरासत में रखने का औचित्य नहीं है। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिरासत में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि जांच एजेंसियों को पर्याप्त समय मिल चुका है और अब आगे की प्रक्रिया न्यायिक तरीके से चलनी चाहिए। इस फैसले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संतुलन का उदाहरण माना जा रहा है।
जांच प्रक्रिया पहले ही हो चुकी पूरी
सुनवाई के दौरान अदालत में यह दलील दी गई कि दोनों नेताओं के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं और जांच की मुख्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि आगे हिरासत की जरूरत नहीं है। जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब जांच के महत्वपूर्ण पहलू पूरे हो चुके हैं। ऐसे में जमानत देना न्यायसंगत है। यह भी कहा गया कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उनके फरार होने की संभावना कम है।
28 मार्च को हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि दोनों नेताओं को 28 मार्च को नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ था। इस कार्रवाई के पीछे सरकार द्वारा गठित जांच आयोग की सिफारिशें बताई गई थीं। गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया था, जबकि सरकार ने इसे कानून के तहत उठाया गया कदम बताया था। इस पूरे घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया था।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा तनाव
इस मामले ने सरकार और विपक्ष के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ओली के समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक थी और उन्हें निशाना बनाया गया। वहीं सरकार का पक्ष है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता। जमानत मिलने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
जमानत मिलने के बावजूद यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच और सुनवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। दोनों नेताओं को कानून के तहत तय शर्तों का पालन करना होगा। इस बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में नेपाल की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने दोनों नेताओं को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की राह अभी भी चुनौतियों से भरी हुई है।
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