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भारत ने वैश्विक संकटों में बढ़ाया व्यापार दायरा
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया कई बड़े आर्थिक और राजनीतिक संकटों से गुज़री है। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव ने वैश्विक व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया। इसी बीच Donald Trump की टैरिफ नीतियों ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ाई। इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक रणनीति को मजबूती दी और नए अवसर तलाशे। Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर खास फोकस किया। इसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खोलना और निर्यात को बढ़ावा देना रहा। इन समझौतों के जरिए भारत ने न सिर्फ आयात-निर्यात संतुलन सुधारा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति भी मजबूत की। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारत को आने वाले वर्षों में एक प्रमुख व्यापारिक शक्ति बना सकते हैं।
एफटीए के जरिए निर्यात को मिला बड़ा बढ़ावा
भारत द्वारा किए गए इन व्यापार समझौतों का सबसे बड़ा फायदा निर्यात क्षेत्र को मिला है। एफटीए के तहत कई देशों ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाए या खत्म किए हैं, जिससे भारतीय सामान सस्ते और प्रतिस्पर्धी बने हैं। टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और कृषि उत्पादों को नए बाजारों में प्रवेश मिला है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी बड़ा लाभ हुआ है। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए। सरकार का लक्ष्य है कि भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए, और ये समझौते उसी दिशा में अहम कदम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन समझौतों का सही तरीके से लाभ उठाया गया, तो भारत का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
मॉरिशस से शुरू हुआ अफ्रीका में विस्तार
भारत ने अपने एफटीए मिशन की शुरुआत मॉरिशस के साथ समझौते से की थी। यह पहली बार था जब भारत ने किसी अफ्रीकी देश के साथ इस तरह का व्यापक व्यापार समझौता किया। इस डील ने अफ्रीका में भारत के लिए नए दरवाजे खोले। मॉरिशस के जरिए भारतीय कंपनियों को अफ्रीकी बाजारों तक पहुंच आसान हुई। इस समझौते के बाद भारत ने अफ्रीका में निवेश और व्यापार दोनों बढ़ाए। खासकर आईटी, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी मजबूत हुई। यह कदम भारत की ‘अफ्रीका फोकस’ नीति का हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य महाद्वीप में अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत करना है।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से मजबूत संबंध
साल 2022 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक अहम एफटीए साइन किया, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई दी। इस समझौते के तहत कई उत्पादों पर टैरिफ कम हुए, जिससे व्यापार बढ़ा। इसके अलावा भारत ने यूएई, जापान और अन्य देशों के साथ भी समझौते किए। इन डील्स ने भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाई। खासकर ऊर्जा, खनिज और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग बढ़ा है। इन समझौतों से भारत को जरूरी संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिली है, जो औद्योगिक विकास के लिए जरूरी हैं।
यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक समझौता
2026 की शुरुआत में भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता किया, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह डील भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यूरोप एक बड़ा और समृद्ध बाजार है। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे। इससे भारत के उद्योगों को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता मानकों को अपनाने में मदद मिलेगी। यह समझौता भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत बनाएगा।
न्यूजीलैंड समेत कई देशों से टैरिफ में राहत
भारत ने न्यूजीलैंड समेत कई देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिनमें भारतीय उत्पादों को लगभग जीरो टैरिफ एंट्री मिली है। इसका मतलब है कि भारतीय सामान बिना अतिरिक्त टैक्स के इन बाजारों में पहुंच सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा हुआ है। खासकर कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। इन समझौतों से भारत के किसानों और छोटे व्यापारियों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का मौका मिला है। कुल मिलाकर, इन सभी डील्स ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और भविष्य के लिए नई संभावनाएं खोली हैं।
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