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फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को निशाना बना रहे थे। यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और देशभर के लोगों को कॉल कर उन्हें झांसे में फंसाता था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को एक हेल्थ कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को विश्वास में लेते थे। इसके बाद उन्हें सस्ते और असरदार उत्पादों का लालच देकर पैसे ऐंठे जाते थे। इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
मोटापा घटाने के नाम पर रची गई साजिश
यह गिरोह खासतौर पर उन लोगों को निशाना बनाता था जो वजन घटाने के लिए उपाय खोज रहे थे। आरोपी फोन कॉल के जरिए दावा करते थे कि उनके पास ऐसे प्रोडक्ट हैं जो कम समय में मोटापा कम कर सकते हैं। वे ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए आकर्षक ऑफर और छूट का लालच देते थे। कई बार तो वे नकली डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट बनकर भी बात करते थे, जिससे लोगों को उन पर भरोसा हो जाता था। इस तरह वे धीरे-धीरे पीड़ितों को अपने जाल में फंसाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे।
शिकायत से खुला पूरे नेटवर्क का राज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि उसे एक कॉल के जरिए मोटापा घटाने वाले प्रोडक्ट का ऑफर दिया गया था और पैसे लेने के बाद आरोपी गायब हो गए। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान पुलिस को एक ऑफिस का पता चला, जहां से यह पूरा रैकेट संचालित हो रहा था। इसके बाद छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
रकम छिपाने के लिए अपनाए जाते थे नए तरीके
आरोपी ठगी की रकम को ट्रेस होने से बचाने के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। जैसे ही किसी पीड़ित से पैसा मिलता, उसे तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा, आरोपी फर्जी दस्तावेजों और सिम कार्ड्स का भी इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। पुलिस अब इन खातों और दस्तावेजों की जांच कर रही है, जिससे इस नेटवर्क के और भी सदस्यों का पता लगाया जा सके।
डिजिटल सबूतों से मिले अहम सुराग
पुलिस को इस मामले में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत भी मिले हैं, जिनमें कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और ट्रांजेक्शन डिटेल्स शामिल हैं। इन सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बना चुका था। पुलिस अब इन सबूतों का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट का विस्तार कितने राज्यों तक था। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसमें कोई बड़ा मास्टरमाइंड शामिल है।
लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी अनजान कॉल या आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर हेल्थ और मेडिकल प्रोडक्ट्स के मामले में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह नई-नई तरकीबें अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। इसलिए जागरूकता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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