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संथाल सम्मेलन में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण उपस्थिति
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में संथाल समुदाय से जुड़े कई प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराएं देश की विविधता और विरासत का अहम हिस्सा हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान एक मुद्दे को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की, जिसने पूरे आयोजन की चर्चा को नई दिशा दे दी।
कार्यक्रम स्थल छोटा होने पर जताई नाराजगी
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि सम्मेलन के लिए चुना गया स्थान अपेक्षाकृत छोटा था, जिसके कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए अधिक विशाल और उपयुक्त स्थल का चयन किया जाना चाहिए था, ताकि सभी इच्छुक लोग कार्यक्रम में भाग ले पाते।
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि कई लोग कार्यक्रम स्थल के बाहर ही रह गए, क्योंकि अंदर पर्याप्त जगह नहीं थी।
दूसरे कार्यक्रम में बड़ा मैदान देखकर आश्चर्य
संथाल सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं। वहां पहुंचकर उन्होंने मैदान का आकार देखा और आश्चर्य व्यक्त किया कि इतना बड़ा स्थान उपलब्ध होने के बावजूद सम्मेलन के लिए छोटा स्थल चुना गया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि ऐसा बड़ा मैदान पहले कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराया जाता तो अधिक लोग शामिल हो सकते थे।
उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम आयोजन और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं और दोनों के बीच सम्मान और स्नेह का संबंध है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन में स्थल चयन को लेकर बेहतर योजना बनाई जा सकती थी।
राष्ट्रपति का यह बयान संतुलित और संयमित था, जिसमें उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की और साथ ही आपसी सम्मान का संदेश भी दिया।
संथाल समुदाय के महत्व पर दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में संथाल समुदाय की संस्कृति, भाषा और परंपराओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह समुदाय भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी विरासत को संरक्षित रखना जरूरी है।
उन्होंने युवाओं को अपनी भाषा और परंपराओं से जुड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया। साथ ही सरकारों और सामाजिक संगठनों से भी आग्रह किया कि वे आदिवासी समुदायों के विकास और शिक्षा पर विशेष ध्यान दें।
कार्यक्रम के बाद चर्चा में रहा आयोजन
सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति का बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे कार्यक्रम आयोजन में सुधार की आवश्यकता के रूप में देखा, जबकि कुछ ने इसे केवल व्यवस्थागत कमी बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन में योजना और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है, ताकि अधिक से अधिक लोग उसमें शामिल हो सकें।
फिलहाल यह आयोजन संथाल समुदाय की संस्कृति और पहचान को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं राष्ट्रपति की टिप्पणी ने आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
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