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परिणाम घोषित होते ही रैंक को लेकर विवाद
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम जारी होते ही एक अनोखा विवाद सामने आ गया है। मेरिट सूची में 301वीं रैंक को लेकर दो अलग-अलग अभ्यर्थियों ने दावा कर दिया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया। दोनों अभ्यर्थियों का नाम आकांक्षा सिंह बताया जा रहा है, जिससे भ्रम और भी बढ़ गया है। परिणाम घोषित होने के बाद जब अभ्यर्थियों और कोचिंग संस्थानों ने सूची का विश्लेषण किया, तब यह मामला सामने आया और धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर भी फैल गया।
एक ही रोल नंबर पर दो दावेदार सामने
मामले को और गंभीर तब माना गया जब दोनों दावेदारों के रोल नंबर को लेकर सवाल उठने लगे। जानकारी के अनुसार दोनों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड में समान या मिलते-जुलते रोल नंबर का उल्लेख सामने आया। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं तकनीकी त्रुटि, डेटा एंट्री की गलती या किसी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं हुई। परीक्षा जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की विश्वसनीयता को देखते हुए इस तरह का मामला सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
गाजीपुर की अभ्यर्थी ने साझा किए दस्तावेज़
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से संबंध रखने वाली एक अभ्यर्थी ने दावा किया कि 301वीं रैंक उन्हीं की है। उन्होंने अपने एडमिट कार्ड, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाण सार्वजनिक किए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई वर्षों की तैयारी के बाद यह सफलता हासिल की है और अब अचानक किसी अन्य दावेदार के सामने आने से स्थिति भ्रमित हो गई है। उनके समर्थकों और परिचितों ने भी आयोग से पारदर्शिता के साथ मामले की जांच करने की मांग की है।
दूसरी अभ्यर्थी का भी सामने आया दावा
वहीं दूसरी ओर एक अन्य अभ्यर्थी, जो राजधानी में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, उन्होंने भी 301वीं रैंक पर अपना अधिकार जताया है। बताया जा रहा है कि उनका नाम भी आकांक्षा सिंह है और उनके दस्तावेज़ों में भी वही रोल नंबर दर्शाया गया है। इस वजह से पूरा मामला और उलझ गया है। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने दावों को सही बताते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा मामला
जैसे ही यह विवाद सामने आया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने आयोग की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए, जबकि कुछ विशेषज्ञों ने इसे तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि की संभावना बताया। कुछ लोगों का कहना है कि नाम और रोल नंबर की समानता की वजह से भ्रम पैदा हुआ होगा, जबकि कुछ ने इसे डेटा प्रबंधन की समस्या माना है। इस वजह से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो गई है।
जांच की मांग, आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
विवाद बढ़ने के बाद अब अभ्यर्थियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की ओर से पूरे मामले की जांच की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को स्पष्ट बयान जारी कर स्थिति साफ करनी चाहिए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। फिलहाल दोनों दावेदार अपने-अपने दावे पर कायम हैं और सभी की नजरें आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो यह मामला और बड़ा विवाद बन सकता है।
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