Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
सुलतानपुर जिला कारागार में एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बहुजन अधिकार सेना ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मांग अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से एक ज्ञापन भेजकर की गई है।
मृतक कैदी की पहचान 48 वर्षीय नक्छेद कोरी के रूप में हुई है, जो सुलतानपुर के ग्राम चरथई, थाना धनपतगंज के निवासी थे। उन्हें 25 मार्च से जेल में रखा गया था। 7 अप्रैल की रात करीब 1:30 बजे कारागार के शौचालय में उनकी संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई।
बहुजन अधिकार सेना के राष्ट्रीय कमांडर विजय राणा चमार द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में कुल आठ प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच (न्यायिक या विशेष जांच दल द्वारा) कराने की मांग शामिल है।
संगठन ने घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता और पुनर्वास प्रदान करने की अपील की गई है।
ज्ञापन में सुलतानपुर सहित प्रदेश की सभी जेलों में सुरक्षा सुधारों पर जोर दिया गया है। इसमें सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य करने और कैदियों की नियमित मेडिकल व मानसिक जांच सुनिश्चित करने की मांग की गई है। हिरासत में होने वाली मौतों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने और उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
बहुजन अधिकार सेना ने पिछले तीन वर्षों में सुलतानपुर जेल में हुई सभी संदिग्ध मौतों और आत्महत्याओं की सूची तैयार कर उनकी पुनः जांच कराने की भी मांग की है। संगठन का आरोप है कि यह घटना जेल प्रशासन की घोर लापरवाही और सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाती है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन है। आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है।
Latest News
Open