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सदर बाजार थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ला में प्रियंका विश्वास (33) की मौत और उसके पिता उदयभानु विश्वास (76) के बेटी के शव के साथ कई दिन तक रहने की घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि यह शहर में इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है। लगभग 12 साल पहले शास्त्रीनगर में डॉ. हरेंद्र मगई के शव के साथ उनके भाई हरीश लगभग एक माह तक रहे थे।
6 सितंबर 2014 को शास्त्रीनगर के बी. ब्लॉक में रहने वाले लोग बी-163 मकान से आ रही दुर्गंध से परेशान हो गए थे। पड़ोस में रहने वाले डॉ. विनोद अग्रवाल ने संदेह होने पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जब मकान के अंदर दाखिल होकर जांच की तो हर कोई हैरान रह गया। यहां रहने वाले डाॅ. हरेंद्र मगई का सड़ा गला शव कमरे में पड़ा था। शव के पास ही उनके बुजुर्ग भाई हरीश सो रहे थे। पड़ोसियों का कहना था कि डाॅ. हरेंद्र अपने बैच के गोल्ड मेडलिस्ट थे। हरीश मानसिक रूप से बीमार थे। वह पार्कों और बाहर पड़ी पॉलिथीन और गंदगी को घर में जमा करता थे। उन्होंने दोनों भाइयों को ही लगभग एक माह से नहीं देखा था। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि डाॅ. हरेंद्र मगई सरधना पीएचसी में सर्जन थे। वर्ष 2006 में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके भाई हरीश नेवी में थे। इसके बाद वह बीमा अभिकर्ता का भी काम करने लगे थे। दोनों भाइयों ने विवाह नहीं किया था। दोनों किसी से वास्ता नहीं रखते थे। उनके दो भाई विदेश में रह रहे थे।
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