Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
दुनियाभर में बढ़ते संघर्ष पर विचार
जैसलमेर में आयोजित चादर महोत्सव के दौरान Jaisalmer पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में चल रही जंग और आपसी झगड़े तभी खत्म होंगे, जब लोग एक-दूसरे के बीच की एकता को समझना शुरू करेंगे। उनका मानना है कि केवल सैन्य शक्ति या कूटनीतिक दबाव विवादों का समाधान नहीं कर सकते।
इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संगठन की भूमिका
भागवत ने विश्व युद्धों और उनके बाद बने संगठनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले विश्व युद्ध के बाद लीग ऑफ नेशंस और दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) बनाए गए, लेकिन वे विवादों को स्थायी रूप से सुलझाने में सफल नहीं हो पाए। उनका कहना है कि बाहरी दबाव और तर्कपूर्ण बहस से स्थायी शांति संभव नहीं होती।
तर्क नहीं, प्रेम से निकलेगा समाधान
मोहन भागवत ने भारतीय चिंतन और परंपरा की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि विवादों को केवल बहस या तर्क-वितर्क से हल नहीं किया जा सकता। प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान ही ऐसे मार्ग हैं जो सभी के लिए स्थायी शांति और समाधान ला सकते हैं। उनका कहना है कि बिना मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक समझ के समस्याओं का समाधान असंभव है।
धर्म और मार्ग की समानता पर जोर
भागवत ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग धर्म और मार्ग इसलिए बने क्योंकि एक ही रास्ता सभी के लिए उपयुक्त नहीं था। उन्होंने कहा कि हर धर्म और मार्ग अपने अनुयायियों को ईश्वर तक पहुंचाने का प्रयास करता है। इस दृष्टिकोण से अंतरधार्मिक समरसता और एक-दूसरे का सम्मान विश्व शांति के लिए आवश्यक है।
सद्भाव और एकता के महत्व पर प्रकाश
आरएसएस प्रमुख ने लोगों से अपील की कि वे न केवल अपने विचारों को, बल्कि अपने हृदय को भी खोलें। उनका कहना है कि विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देना ही विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी तरीका है। प्रेम और सद्भाव ही वैश्विक शांति की कुंजी हैं।
सार और संदेश
भागवत ने अंत में कहा कि दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति को शांति की दिशा में योगदान देना चाहिए। चाहे वह व्यक्तिगत स्तर पर हो या सामूहिक रूप से, प्रेम, एकता और सद्भाव को अपनाना ही विवादों और संघर्षों का स्थायी समाधान है। उनका संदेश था कि सभी धर्म, संस्कृतियां और विचार एक ही उच्चतम लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।
Latest News