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तेहरान में तड़के हुए भीषण हवाई हमले
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब और भी गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाक्रम में इजरायल की वायुसेना ने ईरान की राजधानी Tehran में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। जानकारी के अनुसार तड़के सुबह कई लड़ाकू विमानों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में बमबारी की। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।
80 से ज्यादा लड़ाकू विमानों की कार्रवाई
सैन्य सूत्रों के अनुसार इस अभियान में इजरायल के 80 से अधिक लड़ाकू विमानों को शामिल किया गया था। इन विमानों ने तेहरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और मिसाइल तंत्र को कमजोर करना था। हवाई हमलों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
सैन्य और मिसाइल ठिकानों पर हमले
हमलों के दौरान जिन स्थानों को निशाना बनाया गया उनमें सैन्य ठिकाने, मिसाइल भंडारण स्थल और कथित परमाणु संबंधित ढांचे शामिल बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार कुछ बंकर और लॉन्चिंग सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है। फिर भी इस कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई भी तेज
हमलों के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। ईरानी सैन्य बलों ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ ठिकानों की ओर मिसाइल हमले किए। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।
पड़ोसी देशों में भी बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व के कई देशों ने इस बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता व्यक्त की है। क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनने से सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है। कई देशों ने कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की अपील की है। हालांकि अभी तक हालात में किसी तरह की ठोस शांति पहल सामने नहीं आई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता प्रभाव
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। मध्य पूर्व क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध पर नजर रखी जा रही है और कई देश स्थिति को शांत करने के प्रयासों की उम्मीद कर रहे हैं।
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