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जसपाल राणा को अंतिम सलाम
भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्याय का अवसान, महान शूटर जसपाल राणा के निधन से खेल जगत शोकाकुल
12 Jun 2026, 11:00 AM Uttarakhand - Dehradun
Reporter : Mahesh Sharma
Dehradun

गढ़वाल की धरती से उठी स्वर्णिम चमक

भारतीय खेल इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल रिकॉर्ड नहीं बनाते, बल्कि पूरी पीढ़ी को प्रेरणा देकर खेल संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं। जसपाल राणा भी ऐसे ही महान खिलाड़ियों में शामिल थे। उत्तराखंड की गढ़वाल घाटियों से निकलकर उन्होंने विश्व मंच पर भारतीय निशानेबाजी का परचम लहराया। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर ने देशभर के खेल प्रेमियों को गहरे शोक में डुबो दिया। बताया गया कि विदेश यात्रा से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने के साथ भारतीय निशानेबाजी के उस स्वर्णिम दौर की एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई, जिसने देश को अनेक गौरवपूर्ण क्षण दिए। जसपाल राणा ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर विश्व स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिलता था। यही कारण है कि वह खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रशासकों के बीच समान रूप से सम्मानित रहे।

राष्ट्रीय मंच से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

जसपाल राणा की प्रतिभा बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। खेलों से जुड़े परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें शुरुआत से ही प्रेरणादायक वातावरण मिला। उन्होंने कम उम्र में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी थी। अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए उन्होंने कई प्रतिष्ठित पदक अपने नाम किए और भारत को नई पहचान दिलाई। उनकी एकाग्रता, मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती थी। जब भी वह निशाना साधते थे, देश की उम्मीदें उनके साथ खड़ी दिखाई देती थीं। उनके प्रदर्शन ने भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी और युवाओं में इस खेल के प्रति आकर्षण बढ़ाया। वह केवल एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि उस दौर के प्रतीक बन गए थे जब भारत धीरे-धीरे विश्व खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा था।

कॉमनवेल्थ में गूंजा भारत का नाम

जसपाल राणा का नाम कॉमनवेल्थ खेलों की उपलब्धियों के साथ विशेष रूप से जुड़ा रहेगा। उन्होंने नौ स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा इतिहास रचा, जिसे भारतीय खेल जगत लंबे समय तक याद रखेगा। उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत को कई बार पदक तालिका में मजबूती प्रदान की। हर प्रतियोगिता में उनका आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता देखने लायक होती थी। उन्होंने यह साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी भी विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में दबदबा कायम कर सकते हैं। उनके पदकों ने केवल उपलब्धियों का आंकड़ा नहीं बढ़ाया, बल्कि देश के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान भी दी। उस समय निशानेबाजी जैसे खेल को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। उनकी जीत ने यह संदेश दिया कि निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प से असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यही वजह है कि उन्हें भारतीय निशानेबाजी के स्वर्ण युग का प्रमुख चेहरा माना जाता है।

कोच बनकर गढ़े नए सितारे

प्रतियोगी करियर के बाद जसपाल राणा ने स्वयं को केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कोचिंग को अपना मिशन बनाया और युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिभाशाली निशानेबाजों ने अपनी तकनीक को निखारा और बड़े मंचों तक पहुंचने का सपना साकार किया। वह खिलाड़ियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देते थे, बल्कि मानसिक मजबूती और अनुशासन का महत्व भी समझाते थे। उनकी कोचिंग शैली में अनुभव और संवेदनशीलता का अनूठा मेल देखने को मिलता था। खिलाड़ी उन्हें एक मार्गदर्शक, प्रेरक और संरक्षक के रूप में याद करते हैं। उन्होंने भारतीय निशानेबाजी की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों का प्रभाव आने वाले वर्षों तक भारतीय खेल जगत में महसूस किया जाता रहेगा। कोच के रूप में उनकी विरासत उतनी ही महान है जितनी एक खिलाड़ी के रूप में उनकी उपलब्धियां रही हैं।

खेल जगत में शोक की लहर

जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। कई लोगों ने कहा कि उनका जाना भारतीय खेलों के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जिस समर्पण के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और खेल भावना थी। सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद उन्होंने हमेशा विनम्रता बनाए रखी। यही गुण उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में स्थापित करते हैं। खेल जगत उन्हें केवल पदकों के लिए नहीं, बल्कि उनके मानवीय मूल्यों और प्रेरणादायक जीवन यात्रा के लिए भी याद रखेगा।

अमर रहेगी जसपाल राणा की विरासत

महान खिलाड़ी शरीर से भले ही विदा हो जाते हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियां और आदर्श हमेशा जीवित रहते हैं। जसपाल राणा की कहानी संघर्ष, समर्पण और उत्कृष्टता की मिसाल है। उन्होंने भारत को गर्व करने के अनगिनत अवसर दिए और यह विश्वास जगाया कि भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी। युवा निशानेबाज जब भी लक्ष्य साधेंगे, उन्हें जसपाल राणा की उपलब्धियां और उनका संघर्ष याद आएगा। भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। देश ने एक महान निशानेबाज, कुशल प्रशिक्षक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व को खो दिया है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवंत रहेगी और भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का साहस देती रहेगी।

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