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मेरठ के सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के बीच न जाने की राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के बीच आपसी बंटवारा है, जिसके चलते वे वहां नहीं गए।
उन्होंने कहा- जब पहले टावर को ध्वस्त करने की बात चल रही थी, तब कुछ लोगों ने दावा किया था कि बाकी दुकानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस बयान को लेकर व्यापारियों और जन प्रतिनिधियों के बीच विवाद भी देखने को मिला है।
उन्होंने कहा- अभी भी समाधान की आशा की किरण दिख रही है। व्यापारियों को 2 महीने का समय मिल गया है, और इस दौरान जनता की ओर से सरकार और सुप्रीम कोर्ट से अपील की जाएगी।
डॉ. बाजपेयी ने कहा- सरकार और न्यायालय दोनों ही 'माईबाप' (अभिभावक) के समान हैं। वे उचित व्यक्तियों के माध्यम से न्यायालय के सामने अपना पक्ष फिर से रखेंगे और विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नियमों के दायरे में समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
जन प्रतिनिधियों के वहां न पहुंचने और इसे लेकर हो रही राजनीति पर डॉ. बाजपेयी ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी के घर में दुख होने पर वहां राजनीति करना गलत है। उन्होंने कहा- वे व्यापारियों का समर्थन करने जा सकते हैं, लेकिन वहां राजनीति करने का इरादा नहीं है और ऐसा करना उचित भी नहीं है।
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